मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
वित्तीय दबाव, पेंशनरों की लंबित देनदारियों और प्राकृतिक आपदाओं से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच सुक्खू सरकार ने आज पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों की गांठ कुछ हद तक खोलने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ बैठक में घोषणा की कि 1 जनवरी, 2016 से 31 दिसंबर, 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए क्लास-III पेंशनरों को उनके पेंशन एरियर का 30 प्रतिशत, जबकि क्लास-I और क्लास-II पेंशनरों को 15 प्रतिशत एरियर अक्तूबर में दिया जाएगा। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रदेश पहले से राजस्व घाटे, बढ़ते वित्तीय दायित्वों और आपदाओं से उपजे अतिरिक्त आर्थिक बोझ के बीच संसाधनों का संतुलन साधने की चुनौती से जूझ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं से पूरी तरह अवगत है और उनके समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय लाभ देती रही है तथा आने वाले समय में महंगाई भत्ते की एक और किस्त जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है।
पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों पर मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को इनके भुगतान के निर्देश देने की बात कही। उन्होंने कहा कि 65 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनरों का एरियर सरकार पहले ही जारी कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास में पेंशनरों और कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के फैसले को कर्मचारियों के हित में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन की सुरक्षा देना है।
एरियर की घोषणा के साथ वित्तीय संकट का संदर्भ भी सामने आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जब सत्ता संभाली, तब पूर्व भाजपा सरकार प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ गई थी। इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनरों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी थीं।
राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को वर्ष 1952 से यह अनुदान मिलता रहा है, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने 77 वर्षों से मिल रहे इस अधिकार को बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि आरडीजी केवल सरकार का अधिकार नहीं, बल्कि हिमाचल की जनता का अधिकार है।
उन्होंने प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति को समझाने के लिए आय का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी की एक लाख रुपये की सालाना आय में से 40 हजार रुपये काट लिए जाएं तो उसकी आर्थिक स्थिति क्या होगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहा है और प्रदेश को हर वर्ष 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में हिमाचल को 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में मिले थे। उनके अनुसार, यदि उस समय वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाता तो प्रदेश का कर्ज करीब 30 हजार करोड़ रुपये कम हो सकता था और कर्मचारियों से जुड़ी देनदारियां भी चुकाई जा सकती थीं।
उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए भवनों का भी उल्लेख किया और कहा कि इनमें से कई वर्तमान में खाली पड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछले तीन वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिले हैं और सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रत्येक निर्णय का लक्ष्य हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने सरकार द्वारा पेंशनरों के हित में उठाए गए कदमों की सराहना की और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। बैठक में ज्वाइंट फ्रंट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पेंशनर उपस्थित रहे।