लीज विवाद और वर्षों तक शून्य राजस्व के बाद सुक्खू सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति पर प्रदेश का अधिकार बहाल करवाया; रिकॉर्ड 47.1 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की बोली, 48 करोड़ अग्रिम लाइसेंस फीस और 50 करोड़ निवेश की प्रतिबद्धता

शिमला। वर्षों तक कानूनी विवादों में उलझी रही शिमला की प्रतिष्ठित सार्वजनिक संपत्ति वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल अब हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी के लिए कमाई का एक बड़ा स्रोत बनने जा रही है। कभी लीज विवाद और प्रदेश को शून्य राजस्व मिलने के कारण सरकार के लिए आर्थिक रूप से निष्प्रभावी बनी यह बेशकीमती संपत्ति अब करीब 2,000 करोड़ रुपये के अनुमानित दीर्घकालिक राजस्व का आधार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस मामले को महज संपत्ति के स्वामित्व का विवाद मानकर नहीं छोड़ा, बल्कि कानूनी मोर्चे पर गंभीरता से लड़ते हुए प्रदेश के अधिकारों की निर्णायक पैरवी की। करीब 25 वर्षों से चले आ रहे विवाद के बाद सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के जरिए संपत्ति वापस हासिल करना और अब इसकी संचालन एवं प्रबंधन व्यवस्था के लिए रिकॉर्ड राजस्व हिस्सेदारी की बोली प्राप्त करना सरकार के लिए दोहरी उपलब्धि है। आर्थिक संसाधनों पर दबाव झेल रहे हिमाचल के लिए यह महज एक होटल का व्यावसायिक प्रबंधन नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को राजस्व अर्जन की क्षमता में बदलने की महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल सरकार ने शिमला के प्रतिष्ठित वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के संचालन एवं प्रबंधन के लिए लाइसेंस अधिकार प्रदान करने की प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश सरकार को देने की रिकॉर्ड बोली प्राप्त हुई है। इसे इस प्रकार के लेन-देन में भारत में अब तक की सबसे अधिक राजस्व हिस्सेदारी वाली बोली बताया गया है।

ई-नीलामी की सफलता प्रदेश सरकार द्वारा बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों के बेहतर उपयोग और व्यावसायिक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस व्यवस्था से प्रदेश के राजकोष को नियमित और पर्याप्त राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। 35 वर्षों की लाइसेंस अवधि के दौरान प्रदेश को प्रतिमाह लगभग तीन करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है, जिसमें प्रतिवर्ष तीन प्रतिशत की वृद्धि होगी। इस अवधि में कुल लगभग 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त 48 करोड़ रुपये की अग्रिम लाइसेंस फीस और होटल की संपत्ति में न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता भी सुनिश्चित की गई है।

उल्लेखनीय है कि यह उपलब्धि लगभग 25 वर्षों से चले आ रहे लंबे कानूनी विवाद के समाधान के बाद हासिल हुई है। सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक कार्यवाही के उपरांत होटल की संपत्ति प्रदेश सरकार को वापस मिली। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश सरकार ने होटल की भूमि और संपत्ति, संयुक्त उद्यम कंपनी (ज्वाइंट वेंचर कंपनी) तथा उससे जुड़ी परिसंपत्तियों एवं अधिकारों पर पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही लगभग 400 करोड़ रुपये की नकद राशि भी प्रदेश सरकार को प्राप्त हुई है।

पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न हुई यह नीलामी इस प्रतिष्ठित संपत्ति की आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत होटल और उससे संबंधित मूल परिसंपत्तियों का पूर्ण स्वामित्व प्रदेश सरकार के पास ही रहेगा। यह पहल सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रबंधन और विश्वस्तरीय पर्यटन अधोसंरचना को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही इससे प्रदेश को दीर्घकालिक वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार प्रत्येक महत्वपूर्ण परियोजना और सार्वजनिक संपत्ति में हिमाचल के वैध अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लगभग 25 वर्षों से चले आ रहे कानूनी विवाद का समाधान होना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना और जेएसडब्ल्यू से जुड़े मामलों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं में प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं, ताकि हिमाचल को उसका उचित लाभ मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार राज्य और यहां के लोगों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी तथा प्रत्येक मामले को मजबूती और पारदर्शिता के साथ उठाती रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइल्ड फ्लावर हॉल को प्रदेश सरकार के नियंत्रण में वापस लाना, रिकॉर्ड राजस्व हिस्सेदारी की बोली प्राप्त करना और दीर्घकालिक वित्तीय लाभ सुनिश्चित करना सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में परामर्शदाताओं और कानूनी टीमों के समर्पित प्रयासों की सराहना की, जिनके निरंतर सहयोग और पेशेवर कार्यशैली से प्रदेश के हितों की रक्षा संभव हो सकी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य में भी पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली अपनाते हुए यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य के संसाधनों और संपत्तियों का उपयोग प्रदेश की जनता के सर्वोत्तम हित में हो।

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