मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
शिमला/नंगल, 24 सितंबर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने एक ही दिन पंजाब में नशे के खिलाफ जनअभियान और हिमाचल की पंचायतों के लिए 16वें वित्त आयोग की वित्तीय व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार की भूमिका को सामने रखा। पंजाब के नंगल, श्री आनंदपुर साहिब और गढ़शंकर में नशा विरोधी यात्राओं में शामिल होकर उन्होंने नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल सरकार की कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी और अंतरराज्यीय समन्वय से जोड़ने की बात कही। वहीं, हिमाचल की पंचायती राज संस्थाओं के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत ₹3,744 करोड़ के प्रावधान के लिए केंद्र का आभार जताया।
नंगल में जनसभा को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या किसी एक राज्य की सीमा में बंधी नहीं है, इसलिए इससे निपटने के लिए राज्यों के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी है। पंजाब दौरे के दौरान उन्होंने श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेका और अरदास की। उनके पंजाब दौरे की पुष्टि समकालीन रिपोर्टों में भी हुई है।
जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने पंजाब सरकार पर युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं करवाने का आरोप लगाया और कहा कि रोजगार तथा विकास को गति देने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने पंजाब में भाजपा की सरकार को इस समन्वय से जोड़ते हुए इसे राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।
उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल की जेलों में नशे की तस्करी से जुड़े मामलों में अन्य राज्यों के लोगों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया था कि नशे का नेटवर्क राज्य की सीमाओं से परे फैला हुआ है। उनके अनुसार इसी पृष्ठभूमि में हिमाचल ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए थे। जयराम के अनुसार अंतरराज्यीय समन्वय, तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, युवाओं के लिए रोजगार और सामाजिक भागीदारी—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करने से ही नशे के खिलाफ अभियान को मजबूती मिल सकती है। पंजाब में उनके भाषण में हिमाचल सहित पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त टास्क फोर्स का भी उल्लेख हुआ।
पंचायतों के लिए 3744 करोड़ को बताया ग्रामीण विकास का आधार
इसी दिन जयराम ठाकुर ने 16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹3,744 करोड़ के प्रावधान का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार और पंचायती राज मंत्रालय का आभार जताया। 16वें वित्त आयोग की 2026-31 अवधि के लिए हिमाचल को ग्रामीण स्थानीय निकायों के मद में ₹3,744 करोड़ तथा आपदा प्रबंधन के लिए ₹2,682 करोड़ की राशि अनुशंसित है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3,650 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं और इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए संसाधन बढ़ेंगे। उनके अनुसार 15वें वित्त आयोग के दौरान ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹2,102 करोड़ के मुकाबले 16वें वित्त आयोग में ₹3,744 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो करीब 78 प्रतिशत की वृद्धि है।
वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए यह सहायता मूल और प्रदर्शन आधारित घटकों में विभाजित है। हिमाचल के लिए ₹3,744 करोड़ में ₹2,996 करोड़ बेसिक ग्रांट और ₹748 करोड़ प्रदर्शन आधारित अनुदान के रूप में हैं।
जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि केंद्र से मिलने वाली इस राशि का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि वित्तीय संसाधनों का वास्तविक लाभ गांवों तक पहुंचे। वित्त आयोग की व्यवस्था में स्थानीय निकायों को मिलने वाले अनुदानों के लिए कुछ प्रवेश-स्तरीय शर्तें भी निर्धारित हैं, जिनमें स्थानीय निकायों के संवैधानिक गठन के साथ उनके लेखों का सार्वजनिक प्रकाशन और समय पर राज्य वित्त आयोग का गठन शामिल है।
इस तरह जयराम ठाकुर के दोनों बयानों में सुरक्षा, सामाजिक सरोकार और ग्रामीण विकास के मुद्दे एक साथ उभरते हैं। पंजाब में नशे को लेकर उन्होंने इसे राज्यों की साझा चुनौती बताया, जबकि हिमाचल में पंचायतों के लिए वित्तीय प्रावधान को गांवों के विकास और स्थानीय संस्थाओं की मजबूती से जोड़ा।