मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश

शिमला, 1 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला ने छात्रों से जुड़ी कथित रैगिंग की घटना और इसके बाद सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्टों के संबंध में विश्वविद्यालय का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट किया है। विश्वविद्यालय ने कहा है कि रैगिंग संबंधी शिकायत पर जांच निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत जारी है और अभी तक इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष अथवा निर्णय नहीं लिया गया है।

कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विश्वविद्यालय को 21 अगस्त, 2026 को रैगिंग का आरोप लगाने वाली शिकायत प्राप्त हुई थी। मामले की जांच लागू UGC रैगिंग-रोधी नियमों के अनुरूप रैगिंग-रोधी स्क्वाड और रैगिंग-रोधी समिति सहित निर्धारित संस्थागत तंत्र के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए। जांच लंबित रहते आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में सार्वजनिक करना जांच की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

कुलपति ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता ने अपने स्तर पर अर्की पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। विश्वविद्यालय ने यह FIR दर्ज नहीं कराई। हालांकि, रैगिंग-रोधी नियमों के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए और सक्षम रैगिंग-रोधी तंत्र की सिफारिश पर विश्वविद्यालय ने मामले की जानकारी धामी पुलिस चौकी को विधिवत दे दी थी।

हाल में एक छात्र से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए प्रो. सक्सेना ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के तत्काल बाद रजिस्ट्रार, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर, संबंधित वार्डन तथा अन्य अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। छात्र को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धामी और बाद में चिकित्सकीय जांच एवं निगरानी के लिए IGMC, शिमला ले जाया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारी और फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे तथा संबंधित अधिकारियों और छात्र के परिवार के साथ समन्वय बनाए रखा गया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों की सहायता के लिए SC/ST सेल, समान अवसर सेल, मेंटरिंग व्यवस्था, छात्र कल्याण प्रणालियां और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। छात्रों को किसी भी शैक्षणिक, निजी अथवा अन्य परेशानी की स्थिति में अपने मेंटर, फैकल्टी सदस्यों, डीन (छात्र कल्याण) अथवा कुलपति कार्यालय से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

मीडिया के सवालों के जवाब में कुलपति ने दोहराया कि विश्वविद्यालय CCTV फुटेज सहित उपलब्ध सामग्री और जांच अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने और सक्षम समिति के समक्ष पर्याप्त सामग्री उपलब्ध होने तक विश्वविद्यालय किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेगा।

प्रो. सक्सेना ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से आग्रह किया कि कानूनी जांच से जुड़े मामलों और छात्रों के कल्याण से संबंधित संवेदनशील विषयों पर खबर प्रकाशित करने से पहले विश्वविद्यालय से तथ्यों की पुष्टि की जाए। उन्होंने कहा कि HPNLU पारदर्शिता, छात्रों की सुरक्षा, उचित प्रक्रिया, प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है।

विश्वविद्यालय ने दोहराया कि जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो कानून और लागू नियमों के अनुरूप आवश्यक एवं सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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