मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा

HPNLU में 12वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICLE-2026 का समापन; स्वास्थ्य सेवाओं की नैतिकता से शहरी कचरा प्रबंधन तक समकालीन चुनौतियों पर विमर्श

शिमला, 25 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला में ‘लॉ एंड इकोनॉमिक्स ट्रस्ट’ के सहयोग से आयोजित कानून और अर्थशास्त्र पर 12वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ICLE-2026) का रविवार को समापन हुआ। ‘एक बेहतर समाज के लिए सकारात्मक बाह्य प्रभाव’ विषय पर केंद्रित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा शोधकर्ताओं ने कानून और अर्थशास्त्र के अंतर्संबंधों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर रहा कि सामाजिक चुनौतियों के समाधान और जनकल्याण को प्रभावी बनाने के लिए नीतियों, संस्थागत जवाबदेही तथा विभिन्न विषयों के बीच सहयोग को किस प्रकार उपयोगी बनाया जा सकता है।

सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में नैतिकता और भरोसे से लेकर भारतीय शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय स्थिरता तक के विषयों पर चर्चा हुई। इन विमर्शों ने रेखांकित किया कि बेहतर सामाजिक परिणामों के लिए केवल संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका न्यायसंगत वितरण, पारदर्शी प्रक्रियाएं और जिम्मेदार संस्थागत व्यवहार भी आवश्यक हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सर्जिकल प्रक्रियाओं में सामाजिक पूंजी की भूमिका पर आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता डॉ. श्रीनिवास थाटी ने की। इसमें डॉ. आराधना सिंह, डॉ. अरुण गुप्ता, प्रो. मुरली प्रसाद पांटा और प्रो. प्रवीण कुलश्रेष्ठ ने भाग लिया। चर्चा में मरीजों का भरोसा, चिकित्सा नैतिकता, सूचित सहमति, टीम समन्वय और मानकीकृत सर्जिकल प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया गया।

डॉ. थाटी ने सामाजिक पूंजी, नैतिक चिकित्सा पद्धतियों और बहुविषयक टीम वर्क के महत्व को रेखांकित करते हुए ऑर्थोपेडिक बुनियादी ढांचे, ट्रॉमा केयर तथा राष्ट्रीय अस्पताल प्रत्यायन बोर्ड (NABH) के दिशानिर्देशों के अनुरूप चिकित्सा मानकों पर भी प्रकाश डाला। डॉ. आराधना सिंह ने सर्जिकल सुरक्षा, मरीजों की सूचित सहमति और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। वहीं, डॉ. अरुण गुप्ता ने उपचार के विकल्पों और उनसे जुड़े जोखिमों के बारे में मरीजों को स्पष्ट जानकारी देने तथा चिकित्सा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने पर बल दिया।

प्रो. मुरली प्रसाद पांटा ने भरोसे पर आधारित सेवाओं, संसाधनों के कुशल उपयोग और वितरणात्मक न्याय की अवधारणाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का विश्लेषण किया। प्रो. प्रवीण कुलश्रेष्ठ ने सर्जिकल नैतिकता, पेशेवर आचरण, नियामक ढांचे और विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग की भूमिका पर अपने विचार रखे।

भारतीय शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्थिरता पर केंद्रित दूसरी पैनल चर्चा की अध्यक्षता डॉ. चंद्र शेखर बाहिनीपति ने की। इसमें प्रो. अरिंदम बिस्वास, डॉ. अनिल कुमार रॉय, डॉ. विक्रमादित्य कुमार चौधरी, डॉ. विजय कुमार दास और डॉ. अरविंद कुमार पांडे ने भाग लिया। चर्चा में कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण, लैंडफिल प्रबंधन और शहरी स्थिरता जैसे विषय प्रमुखता से उठे।

विशेषज्ञों ने कचरा संग्रहण प्रणालियों को सुदृढ़ करने, जन-जागरूकता बढ़ाने, प्रभावी प्रोत्साहन तंत्र विकसित करने और अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रियाओं में अनौपचारिक क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा का मूल संदेश यह रहा कि शहरों में पर्यावरणीय स्थिरता हासिल करने के लिए तकनीकी उपायों के साथ नागरिक सहभागिता, व्यावहारिक नीतियों और संस्थागत समन्वय को भी समान महत्व देना होगा।

समापन सत्र की शुरुआत HPNLU की प्रबंधन विषय की सहायक प्रोफेसर डॉ. ईशा शर्मा के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने मुख्य अतिथि, शिक्षाविदों, प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कानून, अर्थशास्त्र और समाज से जुड़े समकालीन मुद्दों पर अकादमिक संवाद को प्रोत्साहित करने में सम्मेलन की भूमिका रेखांकित की।

IIT कानपुर के आर्थिक विज्ञान विभाग के प्रो. मुरली प्रसाद पांटा ने सम्मेलन का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने अकादमिक चर्चाओं, तकनीकी सत्रों और पैनल विमर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्मेलन ने विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों और विशेषज्ञों को अपने विचार साझा करने तथा सकारात्मक सामाजिक परिणामों को बढ़ावा देने में कानून और अर्थशास्त्र की संभावनाओं पर विचार करने का साझा मंच उपलब्ध कराया।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि और आंध्र प्रदेश स्थित द्रविड़ियन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एल.सी. मल्लैया ने अपने संबोधन में निरंतर अकादमिक संवाद और विभिन्न विषयों के दृष्टिकोणों के समन्वय के महत्व पर बल दिया। HPNLU की कुलपति प्रो. प्रीती सक्सेना ने अध्यक्षीय संबोधन में शोध को प्रोत्साहन देने, बौद्धिक विचारों के आदान-प्रदान और अंतरविषयक सहयोग को मजबूत करने में अकादमिक सम्मेलनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

सत्र का समापन HPNLU के सेंटर फॉर लॉ, बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. गिरजेश शुक्ला के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, कुलपति, वक्ताओं, विद्वानों, प्रतिनिधियों, आयोजकों और सम्मेलन के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. जयवीर सिंह; IIT कानपुर के प्रो. मुरली प्रसाद पांटा और प्रो. प्रवीण कुलश्रेष्ठ; IIT तिरुपति के डॉ. चंद्र शेखर बाहिनीपति और डॉ. अरविंद कुमार पांडे; IIT रुड़की के प्रो. अरिंदम बिस्वास; CEPT यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद के डॉ. अनिल कुमार रॉय; JNU के डॉ. विक्रमादित्य कुमार चौधरी तथा NIT पटना के डॉ. विजय कुमार दास सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

इसके अतिरिक्त, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के सदस्य कर्नल प्रकाश तिवारी (सेवानिवृत्त), सेना मुख्यालय के टेरिटोरियल आर्मी निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल एस.एस. पाटिल, वेस्टर्न कमांड के टेरिटोरियल आर्मी ग्रुप के कमांडर ब्रिगेडियर राजेश शर्मा, 133 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी), इको डोगरा के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल दीपक कुमार, छावनी बोर्ड महू की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्योति कपूर, टेरिटोरियल आर्मी के उप महानिदेशक ब्रिगेडियर वेंकटेश और मेजर जनरल संजय पुरी (सेवानिवृत्त) भी सम्मेलन में शामिल हुए।

अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में AIG हॉस्पिटल्स के ऑर्थोपेडिक्स एवं ट्रॉमा विभाग के निदेशक डॉ. श्रीनिवास थाटी, फोर्टिस नोएडा की डॉ. आराधना सिंह, चिकित्सा लापरवाही मामलों के विशेषज्ञ डॉ. अरुण गुप्ता, प्रगति ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन डॉ. G.B.K. राव, लखनऊ के पुलिस उप महानिरीक्षक एवं संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार, CSIR-NEERI के प्रो. सुनील कुमार, इनफिनिट सम मॉडलिंग LLC के संस्थापक डॉ. बद्री नारायणन गोपालकृष्णन और अधिवक्ता डॉ. आनंद दयाल सहित अनेक शिक्षाविद, शोधकर्ता और पेशेवर प्रतिनिधि शामिल रहे।

ICLE-2026 ने विभिन्न शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमियों से जुड़े प्रतिभागियों को एक साझा मंच पर लाकर यह विचार सामने रखा कि कानून और अर्थशास्त्र का प्रभावी समन्वय सामाजिक कल्याण, संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग और सार्वजनिक हित को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ HPNLU, शिमला में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ।

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