न्यायिक व्यवस्था को मजबूती देने की पहल; कानून के विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का वाहक बनने का आह्वान

शिमला, 11 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नशे से जुड़े अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में कांगड़ा और मंडी में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए दो नई अदालतें स्थापित करने की घोषणा की। इस पहल को प्रदेश में नशे के विरुद्ध संस्थागत और न्यायिक कार्रवाई मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समर हिल्स स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ज्ञान पथ सभागार में आयोजित समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 16 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जबकि कानून के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली तीन प्रतिष्ठित हस्तियों को मानद डॉक्टर ऑफ लॉज़ की उपाधि से नवाजा गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं HPNLU के विजिटर न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश ने समारोह की अध्यक्षता की और दीक्षांत भाषण दिया। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों पर बधाई दी और कहा कि नशे की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी कार्रवाई के साथ न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी आवश्यक है। कांगड़ा और मंडी में NDPS मामलों की सुनवाई के लिए दो नई अदालतें स्थापित करने की घोषणा इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को उपलब्ध करवाई जा रही आर्थिक सहायता का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि HPNLU अनुसंधान और उच्च कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरेगा। दीक्षांत भाषण में न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश ने कानून के विद्यार्थियों की भूमिका को केवल कानूनी प्रावधानों की व्याख्या और उनका अनुपालन सुनिश्चित करने तक सीमित न मानते हुए उन्हें समाज के परिवर्तन का सक्रिय वाहक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कानून के पेशेवरों को सामाजिक अभियंता, सामाजिक वास्तुकार और सामाजिक चिकित्सक की भूमिका भी निभानी चाहिए। न्याय की सार्थक स्थापना के लिए कानून की व्याख्या और उसकी तकनीकी समझ के साथ समाज की संरचना, उसकी परिस्थितियों तथा सामाजिक वास्तविकताओं का बोध भी अनिवार्य है। उनके अनुसार, न्याय तभी अधिक प्रभावी और सार्थक हो सकता है, जब कानूनी सिद्धांतों का इस्तेमाल समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए किया जाए। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कानूनी पेशे के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित प्रभावों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने नई तकनीकों के विकास के बीच कानूनी पेशेवरों की बदलती जिम्मेदारियों और न्याय व्यवस्था के समक्ष उभरने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. रामचंद्र राव तथा झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को कानून के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टर ऑफ लॉज़ (ऑनोरिस कॉज़ा) की उपाधि से सम्मानित किया। समारोह का शुभारंभ अकादमिक जुलूस के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीती सक्सेना ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान की प्रगति, शैक्षणिक उपलब्धियों तथा भावी दिशा पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर बी.ए. एलएल.बी. (ऑनर्स), बी.बी.ए. एलएल.बी. (ऑनर्स) और एलएल.एम. के विद्यार्थियों के साथ कानून में पीएचडी प्राप्त करने वाले शोधार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 16 स्वर्ण पदकों के अतिरिक्त फाउंडर चांसलर फेलोशिप पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। HPNLU का तीसरा दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के सम्मान के साथ उनके व्यावसायिक जीवन की नई शुरुआत का अवसर बना। समारोह ने इस विचार को भी रेखांकित किया कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल दक्ष पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील, विवेकशील और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग नागरिक विकसित करना है, जो न्याय, जनसेवा और सामाजिक परिवर्तन में सार्थक भूमिका निभा सकें।

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