मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
शिमला। हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के हालिया हिमाचल दौरे में संगठन की अंदरूनी खींचतान के संकेत सार्वजनिक बयानों के जरिए और स्पष्ट होकर सामने आए हैं। पाटिल ने पार्टी नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी में संयम बरतने और अनुशासन का पालन करने की नसीहत दी, तो राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने पलटकर सवाल खड़ा कर दिया—“अनुशासन सिर्फ मेरे ऊपर ही लागू नहीं होता।” इसके बाद मामला महज बयानबाजी तक सीमित न रहकर संगठन में सक्रियता, जिम्मेदारी और कथित ‘स्लीपर सेल’ तक पहुंच गया।
रजनी पाटिल ने अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान संगठन की जमीनी स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मतभेद होना किसी बड़े संगठन में असामान्य नहीं है, लेकिन इसे संगठन के कामकाज पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। उन्होंने जिला कांग्रेस अध्यक्षों की ओर से ब्लॉक अध्यक्षों द्वारा उनकी बात नहीं सुनने की शिकायतों का भी उल्लेख किया और अनुशासनहीनता पर सख्ती का संदेश दिया।
इसी क्रम में पाटिल ने जगत सिंह नेगी को पार्टी से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देने से बचने की सलाह दी। यही नसीहत अब नेगी के पलटवार का आधार बनी है। नेगी ने कहा कि पार्टी हित में सवाल उठाना अनुशासनहीनता नहीं है और उन्होंने वही बातें सार्वजनिक रूप से कही हैं, जो पार्टी के भीतर और स्वयं प्रभारी के समक्ष भी रखी हैं। उनका तर्क है कि यदि संगठन के भीतर उठाए गए सवालों पर कार्रवाई नहीं होगी तो सवाल उठते रहेंगे।
नेगी यहीं नहीं रुके। उन्होंने पार्टी में मौजूद कथित ‘जयचंदों’ और ‘स्लीपर सेल’ को बाहर किए जाने की मांग उठाई और कहा कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में सम्मान और जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार कार्यकर्ताओं का मनोबल केवल बयानों से नहीं, बल्कि तब भी प्रभावित होता है जब सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर दूसरे लोगों को जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
दिलचस्प यह है कि नेगी ने अपने बचाव में राहुल गांधी के संगठन संबंधी रुख का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि राहुल गांधी भी पार्टी हित में जरूरी मुद्दे उठाने और संगठन को मजबूत करने की बात करते हैं। ऐसे में नेगी के बयान ने अनुशासन बनाम पार्टी के भीतर सवाल उठाने की सीमा को लेकर बहस को और मुखर कर दिया है।
मंत्रिमंडल विस्तार ने भी बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
रजनी पाटिल के दौरे के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार का मुद्दा भी संगठनात्मक खींचतान की पृष्ठभूमि में चर्चा में रहा। पाटिल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार अथवा फेरबदल का औपचारिक प्रस्ताव अभी उनके पास नहीं आया है। बाद में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रस्ताव तैयार कर उन्हें देंगे। दूसरी ओर, सुक्खू पहले ही दिसंबर में सरकार के चार वर्ष पूरे होने से पहले रिक्त पद भरने की संभावना जता चुके हैं।
यानी कांग्रेस संगठन के भीतर अनुशासन, जिला-ब्लॉक समन्वय, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोप और नेतृत्व स्तर पर फैसलों की प्रक्रिया—ये सभी मुद्दे एक ही समय में चर्चा के केंद्र में हैं। पाटिल ने मतभेदों को संगठन में स्वाभाविक बताया है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि अनुशासन से समझौता नहीं होगा। नेगी का पलटवार बताता है कि पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों को केवल अनुशासन की कसौटी पर देखने के बजाय उनके समाधान की मांग भी सामने आ रही है।
रजनी पाटिल के दौरे का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत यही है कि कांग्रेस अब 2027 की तैयारी के साथ संगठन को एक सूत्र में बांधने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसी प्रक्रिया में भीतर मौजूद मतभेद भी सार्वजनिक विमर्श में आ गए हैं। पाटिल ने खुद कहा है कि मतभेद का अर्थ पार्टी का विभाजन नहीं है; वहीं नेगी का पलटवार बताता है कि संगठन के भीतर उठ रहे मुद्दे अभी शांत नहीं हुए हैं।