मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की कमान संभालते ही प्रशासकीय लचर व्यवस्था बदलने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए।  व्यवस्था बदलने के लिए उनकी सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण, वित्तीय अनुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग में पूर्व सरकारों की मात्रात्मक दृष्टिकोण से हटकर गुणात्मक नीति को अपनाया। सुक्खू की सरकार संस्थाओं की संख्या बढ़ाने की बजाय पूर्व में स्थापित संस्थाओं में अपेक्षित मानव संसाधन, संस्था को चलाने के लिए आधुनिक उपकरण व काम करने की परिस्थितियाँ पैदा करने पर जोर दे रही है। यधपि सुक्खू सकार को पूर्व सरकार द्वारा खोलें शिक्षा संस्थानों को बंद करने पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है परंतु मुख्यमंत्री शिक्षा का गुणात्मक स्तर ऊंचा करने के लिए दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की इस नई सोच के परिणाम विद्युत विभाग, शिक्षा के क्षेत्र में, जनकल्याण से जुड़े विभाग, स्वास्थ्य विभाग व अन्य संस्थाओं में दिखाई देने लगे है। बजट के गहन अध्ययन से जानकारी मिलती है कि शिक्षा विभाग में छात्रों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों, को गुणात्मक शिक्षा देने के लिए लैब , लाइब्रेरी, खेलने की सुविधा व बच्चों की सोच को राष्ट्रीय परिधि में ले जाने के लिए सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों व नौकरी तलाशने वाले युवान को नैशनल डिजिटल लाईब्रेरी की पहुंच उपलब्ध कराने कदम फलदाई  होगा ।

शिक्षित नौजवान को सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल  व समयबद्ध करने के लिए सुक्खू की सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए भ्रष्ट व पेपर बेचने बाले चयन बोर्ड को निरस्त कर एचपीएससी को यह काम सौंपा है। इस कदम से हजारों योग्य प्रतिस्पर्धियों का मनोबल बड़ा है।

 लोक निर्माण विभाग में फैली अव्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त  करने के लिए सरकार ने निविदा से लेकर काम पूरा करने तक की प्रक्रिया में जितनी भी खामियां थी उनको टांकने का काम किया है।

 वन विभाग में आज तक पौधारोपण में जबरदस्त गड़बड़ झाला होता रहा। विभाग द्वारा हर वर्ष लाखों पौधे रोपित किए जाते हैं परंतु आज तक किसी ने इस बात की सुध नही ली कि पौधे लगे या लगाए भी की नही। बहुत सी पहाड़ियां आज भी बंजर नजर आती हैं। पौधारोपण को सफल बनाने के लिए सरकार ने इस बार ढाई सौ  हेक्टेयर खाली भूमि को चिन्हित की है। इस भूमि पर पौधारोपण होगा और वन विभाग के समर्पित (डेडीकेटेड) कर्मचारी इन पौधों की देखरेख के लिए 5 साल के लिए नियुक्त किए जाएंगे। ताकि अच्छे परिणाम  मिलें।

 एफआरसीए और एससी की प्रक्रिया को सरल ,सुचारू व निश्चित अवधि में निपटाने के लिए सुक्खू सरकार विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है ताकि विकास के कार्य में अड़चन नआए

 लघु व्यापारियों को उनका काम धंधा चलाने के लिए उनके द्वारा लिए गए बैंक ऋण पर लगने वाले ब्याज का आधा भार सरकार उठाएगी ताकि वह शांति से अपना काम चला सकें।

सरकार ने सामाजिक क्षेत्र में गरीब, विधवा, एकल नारियों और बेसहारा बच्चों व वृद्धों के लिए भी काम किया है।  गरीब,विधवा व एकल नारी को आवास के लिए ₹150000 देने व उनके घर में बिजली और पानी की सुविधा मुफ्त प्रदान करने की योजना बनाई है।  गरीब बच्चों को 1% पर उच्च शिक्षा के लिए ऋण देने की घोषणा भी  सरकार ने की है। अनाथ बच्चों के लिए सुख आश्रय योजना शुरू कर व्यवस्था में परिवर्तन लाने के कदम उठाए है। 

       सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन का सबसे सराहनीय और साहसी कदम है राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए  जल विद्युत परियोजना पर जल उपकर और शराब की दुकानों की नीलामी। विगत 10 वर्षों से कांग्रेस व भाजपा की सरकारें इन लोगों के सामने नतमस्तक थी । भाजपा तो आज भी जल उपकर को लेकर कोई न कोई सूत्र उठाकर हाइड्रो पावर उत्पादकों का पक्ष रख रही है । यही नहीं नेता प्रतिपक्ष तो सुक्खू सरकार की शराब नीति को छोटे सर्कल और बड़े सर्कल  के खेल में उलझाते नजर आए । सुखविंदर सिंह ठाकुर की सरकार ने बीते 100 दिनों में व्यवस्था बदलने के कई सराहनीय कदम उठाए हैं लेकिन अभी भी कई साहसी कदम उठाना बाकी हैं।

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