3754 ग्राम पंचायतों में मतदान तीन चरणों—26, 28 और 30 मई—को संपन्न होगा

ज्ञान ठाकुर | शिमला, 28 अप्रैल
हिमाचल प्रदेश में जमीनी लोकतंत्र का महापर्व आरंभ हो चुका है। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का औपचारिक ऐलान होते ही पूरे प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और आदर्श चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त अनिल खाची ने शिमला में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि प्रदेश की 3754 ग्राम पंचायतों में मतदान तीन चरणों—26, 28 और 30 मई—को संपन्न होगा।
इस लोकतांत्रिक अभ्यास में प्रदेश के 50 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 52 हजार से अधिक युवा मतदाता पहली बार लोकतंत्र की इस प्रक्रिया में भागीदारी निभाएंगे। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त संकेत है।
चुनावी परिदृश्य की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेशभर में 21,678 मतदान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद लोकतंत्र की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए किन्नौर की सोना पंचायत से लेकर लाहौल-स्पीति के काजा ब्लॉक के कॉमिक (4587 मीटर ऊंचाई) तक मतदान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं—जो इस प्रक्रिया को केवल चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनाते हैं।

इस बार पंचायत चुनावों में कुल 31,182 पदों पर प्रतिनिधियों का चयन होगा, जिनमें 3754 प्रधान, इतने ही उपप्रधान, 21,654 वार्ड सदस्य, 1769 पंचायत समिति सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। इनमें से 15,656 पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं, जो स्थानीय शासन में महिला सशक्तिकरण की सुदृढ़ होती भूमिका को दर्शाते हैं।
नामांकन प्रक्रिया 7, 8 और 11 मई को होगी, जबकि 12 मई को छंटनी और 14-15 मई को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्राम पंचायत स्तर के परिणाम मतदान के दिन ही घोषित कर दिए जाएंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के नतीजे 31 मई को सामने आएंगे।
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वेब कास्टिंग की व्यवस्था की जा रही है तथा सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिला परिषद चुनाव के लिए व्यय सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है, जबकि अन्य पदों के लिए कोई स्पष्ट सीमा तय नहीं की गई है।
विशेष उल्लेखनीय यह है कि कुल्लू जिले की चार पंचायतों को छोड़कर शेष सभी पंचायतों में चुनाव होंगे। इस व्यापक प्रक्रिया के साथ ही प्रशासन ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों से आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।
दरअसल, ये चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि गांवों की दिशा और विकास की धुरी तय करने का अवसर हैं। जब मतदाता मतदान केंद्र तक पहुंचता है, तो वह केवल एक मत नहीं डालता—वह अपने क्षेत्र के भविष्य, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव को मजबूत करता है।