
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के केंद्र में जनसेवा को स्थापित करने का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा के फतेहपुर से विकास की बहुआयामी रूपरेखा पेश की। घोषणाओं और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह साफ दिखा कि सरकार अब शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के जखबड़ में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा करते हुए क्षेत्रीय विकास को नई गति देने का भरोसा दिलाया। साथ ही, शाह नहर परियोजना का प्रमुख अभियंता कार्यालय, जिसे पूर्व में फतेहपुर से मंडी स्थानांतरित किया गया था, अब पुनः फतेहपुर में स्थापित किया जाएगा—यह निर्णय स्थानीय प्रशासनिक संतुलन को बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। महिला मंडलों को 20-20 हजार रुपये की सहायता और वजीर राम सिंह स्टेडियम के जीर्णोद्धार हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा भी की गई।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि 30 जून तक सभी सीबीएसई पैटर्न पर लाए गए स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम लागू करने और 151 स्कूलों को सीबीएसई ढांचे में लाने के फैसले के बाद अब शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उनके अनुसार, यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

पूर्व सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में प्राप्त भारी वित्तीय संसाधनों के बावजूद जनहित की बजाय ठेकेदारी व्यवस्था को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने दावा किया कि करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए कई भवन आज भी खाली पड़े हैं—जो नीतिगत प्राथमिकताओं की विफलता को उजागर करते हैं। वहीं, हिमकेयर योजना में कथित अनियमितताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पुरुषों के नाम पर भी ओवरी ऑपरेशन दर्शाए गए। इस पर राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। फतेहपुर में आठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को उन्होंने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि एम्स की तर्ज पर आधुनिक मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि लोगों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर इलाज मिल सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने प्राकृतिक हल्दी की खरीद 150 रुपये प्रति किलो, गाय और भैंस के दूध की खरीद क्रमशः 61 और 71 रुपये प्रति लीटर की दर से करने की बात कही। ढगवार में 200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने जा रहे मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट को उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने वाला परिवर्तनकारी कदम बताया। मछुआरों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, बंद अवधि में 3500 रुपये सम्मान राशि और रॉयल्टी में भारी कटौती जैसे निर्णयों को भी उन्होंने ग्रामीण आय सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा बताया।
सामाजिक सुरक्षा के दायरे को विस्तार देते हुए मुख्यमंत्री ने ‘अपना परिवार-सुखी परिवार योजना’ के तहत अति गरीब परिवारों की महिलाओं को 1500 रुपये मासिक पेंशन और 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा का उल्लेख किया। बीपीएल सर्वे के माध्यम से अब तक एक लाख से अधिक अति गरीब परिवारों की पहचान की जा चुकी है।
इस अवसर पर राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं विधायक भवानी सिंह पठानिया ने विकास परियोजनाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निर्माणाधीन पुल क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देगा। उनके अनुसार, यह परियोजना न केवल आवागमन की बाधाओं को समाप्त करेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक निवेश का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
समारोह में कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार अब घोषणाओं के साथ-साथ जवाबदेही और संरचनात्मक बदलाव के जरिए अपनी नीतिगत विश्वसनीयता को मजबूत करने की कोशिश में है।