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मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ ग्राम परिवेश

घुमारवीं की मिट्टी से निकली एक बेटी ने यह साबित कर दिया कि सपनों की ऊँचाई संसाधनों की मोहताज नहीं होती। राजकीय स्कूल की टाटपट्टी से शुरू हुआ सफर आज देश की शीर्ष कर प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुँच गया है। वर्ष 1991 बैच की भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी विदिशा कालड़ा को हाल ही में गोवा एवं कर्नाटक का प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त नियुक्त किया गया है। उन्होंने बेंगलुरु स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण कर लिया है।

बिलासपुर जिले की कपाड़ा पंचायत से संबंध रखने वाली विदिशा कालड़ा की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोड़ा सेक्टर में हुई। सीमित संसाधनों वाले सरकारी विद्यालय से निकलकर उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और फिर भारतीय राजस्व सेवा में अपनी प्रतिभा, अनुशासन और कर्मनिष्ठा का ऐसा परिचय दिया कि आज वे देश के सबसे वरिष्ठ कर प्रशासकों में शुमार हैं।

उनकी यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक पदोन्नति नहीं, बल्कि उन करोड़ों विद्यार्थियों के विश्वास की पुनर्स्थापना है जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हुए बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। यह कहानी बताती है कि प्रतिभा का मूल्य भवनों की चमक से नहीं, बल्कि संघर्ष की तपिश और लक्ष्य के प्रति समर्पण से तय होता है।

प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त का पद भारतीय आयकर विभाग की सर्वोच्च प्रशासनिक जिम्मेदारियों में गिना जाता है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी एक या अधिक राज्यों की कर व्यवस्था, कर संग्रहण, अनुपालन, जांच और मूल्यांकन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की धुरी होता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए केवल कठिन प्रतियोगी परीक्षा ही नहीं, बल्कि तीन दशक से अधिक की निष्कलंक सेवा, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक दक्षता की कसौटी से गुजरना पड़ता है।

विदिशा कालड़ा का परिवार भी शिक्षा और बौद्धिक परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके पिता डॉ. टी.आर. शर्मा राजनीति विज्ञान के प्रख्यात प्रोफेसर और शोधकर्ता रहे हैं तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी में रिसर्च फेलो भी रहे। उनकी माता स्वर्गीय उपर शर्मा महाविद्यालय प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। पति जितेंद्र कालड़ा राष्ट्रीय बैंकिंग संस्थान में वरिष्ठ अधिकारी हैं, जबकि उनके भाई विभोर ऑस्ट्रेलिया में अकादमिक स्कॉलर हैं।

चंडीगढ़ में निवास करने के बावजूद विदिशा कालड़ा का अपने गांव और जड़ों से जुड़ाव आज भी वैसा ही है। अवसर मिलते ही वे घुमारवीं आना नहीं भूलतीं। परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा में भी उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

विदिशा कालड़ा की यह यात्रा हिमाचल की उन बेटियों के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल अध्याय है, जो सरकारी स्कूलों की साधारण कक्षाओं में बैठकर असाधारण भविष्य के सपने बुन रही हैं।

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