
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
कानून की शिक्षा केवल विधिक धाराओं और न्यायिक निर्णयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि तर्कशीलता, नैतिकता, संवेदनशीलता और सतत अध्ययन की जीवनशैली भी इसकी अनिवार्य शर्त है। इसी सोच के साथ हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला ने ‘दीक्षारंभ-2026’ के माध्यम से नए छात्र-छात्राओं का न केवल औपचारिक स्वागत किया, बल्कि उन्हें विधि अध्ययन की बारीकियों, पेशेगत मूल्यों और न्यायिक दायित्वों से भी गहराई से परिचित कराया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एक सफल विधिवेत्ता बनने के लिए पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव, तार्किक चिंतन और व्यापक अध्ययन की आदत समान रूप से आवश्यक है।
शिमला, 25 जुलाई: हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला ने माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के नेतृत्व में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ-2026’ का प्रेरणादायी समापन किया। स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति, संस्थागत मूल्यों, विधि अध्ययन की बुनियादी अवधारणाओं तथा सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के अवसरों से परिचित कराना था।

समापन सत्र में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष वर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ डीन (एकेडमिक अफेयर्स) के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक, व्यावसायिक तथा सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून की शिक्षा का वास्तविक आधार तर्कसंगतता, वैचारिक स्पष्टता और संवेदनशील दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि एक सक्षम विधिवेत्ता वही बन सकता है, जो मस्तिष्क की तार्किकता और हृदय की मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन स्थापित कर सके। उन्होंने विद्यार्थियों को व्यापक अध्ययन की आदत विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि निरंतर पढ़ने से विचारों का विस्तार, भाषा की परिपक्वता और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है, जो विधिक पेशे की सबसे बड़ी पूंजी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष वर्मा ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्व के सबसे सम्मानित व्यवसायों में से एक का हिस्सा बनने पर बधाई देते हुए कहा कि कानून का क्षेत्र केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि असीम संभावनाओं का द्वार है। उन्होंने सफलता के लिए कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प, विषय की गहन समझ और निरंतर आत्मविकास को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा विद्यार्थियों के लिए न्यायपालिका, वकालत, प्रशासन, कॉर्पोरेट क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों में सार्थक करियर के अवसर खोलती है।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना ने कहा कि कानून की पढ़ाई अनुशासन, समर्पण और आजीवन सीखते रहने की प्रवृत्ति की मांग करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि अनुभव आधारित सीख अक्सर केवल पुस्तकीय ज्ञान की तुलना में अधिक स्थायी और प्रभावशाली होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के संरक्षण तथा जीवन और अध्ययन के बीच संतुलन बनाए रखने का भी आग्रह किया।
‘दीक्षारंभ-2026’ के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संरचना, परीक्षा प्रणाली, पुस्तकालय संसाधनों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, विभिन्न समितियों, छात्र सहायता तंत्र तथा संस्थागत प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। फैकल्टी सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के साथ संवाद के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के जीवंत शैक्षणिक वातावरण और उसकी कार्यप्रणाली को निकट से समझा।
कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) आलोक कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। ‘दीक्षारंभ-2026’ ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों की विधिक यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करते हुए यह संदेश दिया कि उत्कृष्ट विधि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता विकसित करने की प्रक्रिया भी है।