HPNLU शिमला में चौथी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता संपन्न, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को सिखाए विवाद समाधान के व्यावहारिक गुर
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
शिमला। विवादों का समाधान केवल कानूनी दलीलों और जीत-हार के दायरे में नहीं, बल्कि संवाद, सहानुभूति और एक-दूसरे के हितों को समझने की क्षमता में भी निहित है। इसी सोच को केंद्र में रखकर हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला में आयोजित चौथी समन्वय इंटरनेशनल मीडिएशन कॉम्पिटिशन-2026 का समापन हुआ। प्रतियोगिता ने भावी कानूनी पेशेवरों को मध्यस्थता, बातचीत और वैकल्पिक विवाद समाधान की व्यावहारिक बारीकियों से परिचित कराने के साथ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान किया।
3 नवंबर को आयोजित समापन समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं HPNLU शिमला के पूर्व चांसलर न्यायमूर्ति संजय करोल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन (ADR) सेल की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में देश-विदेश के विद्यार्थियों और मध्यस्थता क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया।
समारोह में नीदरलैंड के IMI-प्रमाणित मध्यस्थ पास्कल कॉमवालियस, इटली के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ कोराडो मोरा (FCIArb-Med.), अमेरिका की कोर्ट-अनुमोदित मध्यस्थ प्रो. (डॉ.) मैरी लू ब्रायंट फ्रैंक तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्वागत संबोधन में HPNLU की कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए ADR सेल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विवाद समाधान की प्रक्रिया में मध्यस्थता की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। विद्यार्थियों को केवल विधिक ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय सहानुभूति, प्रभावी संवाद और पारस्परिक समझ जैसे मानवीय कौशल भी विकसित करने चाहिए।
पास्कल कॉमवालियस ने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अनुभवी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ संवाद और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है। कोराडो मोरा ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं भावी कानूनी पेशेवरों में व्यावसायिक दक्षता विकसित करने के साथ वैकल्पिक विवाद समाधान के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों को समझने में सहायक होती हैं। बदलती कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने में इस तरह की पहल की अहम भूमिका है।
प्रो. (डॉ.) मैरी लू ब्रायंट फ्रैंक ने प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के दौरान अर्जित कौशल को व्यावसायिक जीवन में भी अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से सक्रिय श्रवण (एक्टिव लिसनिंग) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मध्यस्थता में केवल कही गई बातों को सुनना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन शब्दों के पीछे छिपी भावनाओं, चिंताओं और वास्तविक हितों को समझना भी जरूरी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास ने कहा कि मध्यस्थता की शुरुआत तब होती है, जब व्यक्ति जीतने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि दूसरे पक्ष को समझने के लिए सुनता है। उन्होंने विवादों के समाधान और संवाद की स्वस्थ संस्कृति विकसित करने में धैर्य, सहानुभूति और सार्थक बातचीत को अनिवार्य बताया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति संजय करोल ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यस्थता की सफलता सुनने, विचार करने और उसके बाद उचित कदम उठाने की प्रक्रिया में निहित है। वर्तमान समय में मध्यस्थता की आवश्यकता और प्रासंगिकता बढ़ रही है। यह न केवल विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का माध्यम है, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और खुशहाली बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रतियोगिता के परिणाम
समापन समारोह में प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की गई। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (UILS) ने सर्वश्रेष्ठ मध्यस्थ (बेस्ट मीडिएटर) का खिताब अपने नाम किया और ₹30 हजार का नकद पुरस्कार प्राप्त किया। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर इस श्रेणी में उपविजेता रही, जिसे ₹15 हजार का पुरस्कार दिया गया।
वहीं, सर्वश्रेष्ठ बातचीत करने वाली जोड़ी (बेस्ट नेगोशिएटिंग पेयर) का खिताब पश्चिम बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज (WBNUJS), कोलकाता ने जीता। विजेता टीम को ₹50 हजार का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी श्रेणी में NUJS, कोलकाता उपविजेता रही और उसे ₹25 हजार का पुरस्कार मिला।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने व्यावहारिक मध्यस्थता अभ्यासों में हिस्सा लेकर अपने विचार साझा किए तथा विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर प्राप्त किया। आयोजन ने सक्रिय श्रवण, सहानुभूति, सहयोग और हितों पर आधारित बातचीत की उस अवधारणा को मजबूती दी, जो विवादों को टकराव के बजाय समझ और सहमति के माध्यम से सुलझाने पर बल देती है।
औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ। समन्वय-2026 का आयोजन HPNLU शिमला की अनुभवात्मक कानूनी शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में विद्यार्थियों की व्यावहारिक दक्षता और पेशेवर समझ विकसित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित कर गया।