“अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ मानव संसाधन और एलाइड एंड हेल्थकेयर शिक्षा के विस्तार पर जोर; मरीजों को प्रदेश में ही बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने का लक्ष्य”
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, सुदृढ़ चिकित्सा अधोसंरचना और प्रशिक्षित मानव संसाधन से जोड़कर उपचार को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ बनाने की दिशा में सरकार ने हमीरपुर में नई पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अकादमिक ब्लॉक का लोकार्पण करने के साथ प्रदेश के पहले एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता का विस्तार करने और मरीजों को उन्नत उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की मजबूरी कम करने के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवर तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 40 वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक सुधार हो रहा है। सरकार परंपरागत कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। लक्ष्य है कि आगामी दस वर्षों में हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो और दूसरे राज्यों से भी लोग यहां उपचार के लिए आएं।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में एमआरआई, 3 टेस्ला एमआरआई सहित अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश के चार चिकित्सा महाविद्यालयों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटेड लैब स्थापित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि लोगों को घर के नजदीक बेहतर उपचार मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता केवल आधुनिक मशीनों और भवनों से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए पर्याप्त चिकित्सक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी आवश्यक है। इसी दिशा में चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले चिकित्सकों के बॉन्ड संबंधी प्रावधानों में छूट देने पर भी विचार कर रही है। बीएससी नर्सिंग और रेडियोग्राफर प्रशिक्षण की सीटों में वृद्धि भी इसी प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ मरीज-केंद्रित व्यवहार को भी प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला और टांडा चिकित्सा महाविद्यालय के बाद अब हमीरपुर और नेरचौक में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एमबीबीएस विद्यार्थियों को 60-60 के बैच में पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
हमीरपुर में शुरू किए गए एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज में कुल 210 सीटों के साथ चार पाठ्यक्रम आरंभ किए गए हैं। इनमें बैचलर ऑफ मेडिकल लैब साइंस और बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी की 60-60 सीटें, बैचलर ऑफ एनेस्थीसिया की 60 सीटें तथा डायलिसिस की 30 सीटें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष चार और पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इससे युवाओं के लिए शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर बढ़ेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 200 करोड़ रुपये से निर्मित अकादमिक ब्लॉक चिकित्सा महाविद्यालय की संस्थागत अधोसंरचना को मजबूत करेगा तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की क्षमता बढ़ाएगा। एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज के माध्यम से चिकित्सकों को सहयोग देने वाले तकनीकी एवं सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
इस अवसर पर प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के समन्वयक नरेश ठाकुर, उप-संयोजक संजय भारद्वाज, जिला कांग्रेस कमेटी हमीरपुर की अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र वर्मा, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने 4.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के आवासीय परिसर का उद्घाटन किया। उन्होंने 1.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले स्ट्रीट फूड पार्क तथा 10 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बाल देखभाल संस्थान, हमीरपुर की आधारशिला भी रखी।