मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
कुछ लोग गोल्डन स्पून के साथ जन्म लेते हैं, तो कुछ अपने भीतर बहुआयामी प्रतिभाओं की अनमोल पूंजी लेकर दुनिया में आते हैं और अपनी विशिष्ट पहचान गढ़ने की राह पर अग्रसर हो जाते हैं। ऐसी ही बहुआयामी प्रतिभा की धनी शिमला के ऑकलैंड हाउस स्कूल की छात्रा पृथा डोगर ने वंदना भागड़ा की कोख से जन्म लेकर बचपन से ही अपनी सृजनात्मकता के विविध रंग बिखेरने शुरू कर दिए। लेखन के साथ कला, संगीत, चित्रकला और अन्य विधाओं में उनकी रुचि ने उनकी प्रतिभा को बहुआयामी विस्तार दिया। महज 15–16 वर्ष की किशोरावस्था में प्रिथा ने विद्यालय के परिसर से निकलकर वैश्विक लेखन मंच पर अपनी सृजनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया है। राष्ट्रमंडल के 56 सदस्य देशों से प्राप्त 53,840 प्रविष्टियों के बीच प्रतिष्ठित गोल्ड अवॉर्ड हासिल करना उनकी लेखकीय प्रतिभा, वैचारिक परिपक्वता और कल्पनाशील अभिव्यक्ति का उल्लेखनीय प्रमाण है।
ऑकलैंड हाउस स्कूल की कक्षा 12वीं (ह्यूमैनिटीज़) की छात्रा पृथा ने ‘द क्वीन्स कॉमनवेल्थ राइटिंग कॉम्पिटिशन 2026″ में स्वर्ण पदक जीतकर विद्यालय का गौरव बढ़ाया है। युवाओं के लिए आयोजित राष्ट्रमंडल की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय लेखन प्रतियोगिताओं में शामिल इस प्रतिस्पर्धा में उनकी पुरस्कृत रचना का शीर्षक ‘Souls Translated’ है। इस रचना के माध्यम से उन्होंने यह विचार प्रभावशाली ढंग से उभारा है कि व्यक्तिगत रुचियाँ और साझा शौक भाषा, संस्कृति तथा सामाजिक पृष्ठभूमि की सीमाओं से परे जाकर लोगों को एक-दूसरे के करीब ला सकते हैं।
वर्ष 2026 की प्रतियोगिता का विषय ‘Common Ground: Better Together’ था। इसके माध्यम से युवा लेखकों को राष्ट्रमंडल की सांस्कृतिक विविधता के बीच विद्यमान उन साझा मूल्यों, अनुभवों और आकांक्षाओं को तलाशने के लिए प्रेरित किया गया, जो लोगों को आपस में जोड़ते हैं। पृथा ने अपने शौक और व्यक्तिगत रुचियों को अभिव्यक्ति का आधार बनाकर इस विषय को एक मानवीय दृष्टि प्रदान की। उनकी रचना का केंद्रीय भाव इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भौगोलिक दूरियाँ और सांस्कृतिक भिन्नताएँ मानवीय जुड़ाव की बाधा नहीं बनतीं; कई बार साझा रुचियाँ ही अपरिचित लोगों के बीच संवाद, समझ और आत्मीयता का सेतु बन जाती हैं।
पठन-पाठन की शौकीन पृथा की रचनात्मक लेखन में विशेष रुचि है। इतिहास, राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रति उनकी गहरी दिलचस्पी उनके बौद्धिक क्षितिज की व्यापकता और दुनिया को उसके विविध सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक संदर्भों में समझने की जिज्ञासा को दर्शाती है। विषयों को गहराई से समझना, विचारों का विश्लेषण करना और उन्हें स्पष्ट एवं प्रभावशाली अभिव्यक्ति देना उनकी लेखकीय क्षमता के महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। उनकी उपलब्धि यह भी संकेत देती है कि साहित्यिक सृजन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुभवों को समझने, विचारों को परखने और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने की एक गंभीर प्रक्रिया है।
पृथा की सफलता का एक विशेष पहलू उनकी निरंतर प्रगति है। उन्होंने पिछले वर्ष इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया था, जबकि इस वर्ष स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी उपलब्धि को नई ऊँचाई दी है। कांस्य से स्वर्ण तक का यह सफर उनकी लेखन-साधना, निरंतर प्रयासों और अपनी अभिव्यक्ति को अधिक परिपक्व बनाने की प्रतिबद्धता को सामने लाता है। जब प्रतियोगिता में राष्ट्रमंडल के 56 सदस्य देशों से रिकॉर्ड 53,840 प्रविष्टियाँ शामिल हुई हों, तब इस विशाल वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच स्वर्ण पदक हासिल करने का महत्त्व और भी बढ़ जाता है।
पृथा की उपलब्धि युवा पीढ़ी में पठन-पाठन, स्वतंत्र चिंतन और रचनात्मक लेखन की भूमिका को भी रेखांकित करती है। ऐसी प्रतिभाएँ यह संदेश देती हैं कि विचारों की गहराई, संवेदनशील दृष्टि और उन्हें प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने की क्षमता किसी भी युवा को अपनी भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान दिला सकती है। लेखन का वास्तविक सामर्थ्य केवल अपनी बात कहने में नहीं, बल्कि दूसरों के अनुभवों को समझने और भिन्नताओं के बीच साझा मानवीय धरातल तलाशने में निहित है। पृथा की पुरस्कृत रचना इसी व्यापक दृष्टि को सामने लाती है।
द क्वीन्स कॉमनवेल्थ राइटिंग कॉम्पिटिशन का आयोजन रॉयल कॉमनवेल्थ सोसाइटी द्वारा वर्ष 1883 से किया जा रहा है। इसे विद्यालय स्तर की दुनिया की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय लेखन प्रतियोगिता माना जाता है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं को समसामयिक विषयों पर विचार करने, राष्ट्रमंडल के साझा मूल्यों को समझने और अपनी लेखकीय अभिव्यक्ति के माध्यम से व्यापक सामाजिक संवाद में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है। यह मंच युवाओं में सहानुभूति, खुले विचारों और साझा जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पृथा डोगर की यह उपलब्धि ऑकलैंड हाउस स्कूल के लिए गौरव का विषय होने के साथ उभरते युवा लेखकों के लिए प्रेरणा भी है। उनका सफर इस बात को रेखांकित करता है कि प्रतिभा की वास्तविक ऊँचाई केवल किसी एक उपलब्धि से नहीं, बल्कि सीखने की निरंतर ललक, विचारों की मौलिकता और अभिव्यक्ति को निखारने के सतत प्रयासों से तय होती है। कांस्य से स्वर्ण तक पहुँची पृथा की लेखकीय यात्रा इस बात का उदाहरण है कि जब जिज्ञासा को अध्ययन, कल्पनाशीलता को संवेदना और प्रतिभा को निरंतर परिश्रम का संबल मिलता है, तो किशोर उम्र की लेखनी भी वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करा सकती है।