पुलिस की भूमिका पर भी उठाए सवाल, एफआईआर में आरोपियों के नाम ‘अज्ञात’ दर्ज करने पर जताई गंभीर चिंता

ग्राम परिवेश

शिमला, 16 अक्टूबर। शिमला में बालूगंज और चक्कर के बीच कथित अवैध निर्माण तथा हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने संबंधित स्थल पर आगे किसी भी तरह के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने और नगर निगम शिमला को इस संबंध में तुरंत आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए न्यायालय ने टिप्पणी की कि पूर्व आदेश में संदिग्धों और निर्माणकर्ता कंपनी का नाम दर्ज होने के बावजूद एफआईआर में आरोपियों की पहचान ‘अज्ञात’ दर्शाना प्रथम दृष्टया उन्हें बचाने का जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। न्यायालय ने एक शिकायत के आधार पर इस मामले का संज्ञान लिया था, जिसमें बोइलियूगंज-चक्कर मार्ग के बीच दो बड़ी इमारतों में पांच से छह मंजिल से अधिक निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया था।

न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को वन विभाग के अधिकारियों और नगर निगम आयुक्त के साथ मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में निर्माण की स्वीकृति, भूमि की प्रकृति और संबंधित सड़क के निर्माण को सक्षम अधिकारियों की अनुमति मिलने जैसे पहलुओं की जांच करने को कहा गया था।

एफआईआर में आरोपियों के नाम ‘अज्ञात’ दर्ज करने पर सवाल

न्यायालय ने पुलिस थाना वेस्ट, बोइलियूगंज के एसएचओ द्वारा दाखिल हलफनामे का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 अक्टूबर, 2026 को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 326(बी) और 125 के तहत एफआईआर संख्या 216 दर्ज की गई थी। हालांकि, न्यायालय ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि एफआईआर के कॉलम संख्या छह और सात में ज्ञात संदिग्धों तथा आरोपियों का विवरण रिक्त छोड़कर उन्हें ‘अज्ञात’ दर्शाया गया है।

न्यायालय के अनुसार, पिछले आदेश में उन संदिग्धों और आरोपियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज किए गए थे, जिनमें निर्माण कार्य कर रही कंपनी मेसर्स तेनजिन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी। इसके बावजूद एफआईआर में नामों का उल्लेख न होना गंभीर चूक है। न्यायालय ने इसे पुलिस अधिकारियों की ओर से दोषियों को संरक्षण देने के जानबूझकर किए गए प्रयास का संकेत बताया।

छह मंजिला इमारत से घाटी का दृश्य बाधित, बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की विस्तृत रिपोर्ट में मौके पर हुए निर्माण और हरित क्षेत्र को अनधिकृत रूप से नुकसान पहुंचाने का गंभीर विवरण सामने आया है। न्यायालय ने रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि वन विभाग, नगर निगम और पुलिस विभाग की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की गतिविधियां होती रहीं। रिपोर्ट में इन तीनों विभागों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्यप्रणाली को मिलीभगत की आशंका से जुड़ा बताया गया है।

रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत तस्वीरों के अवलोकन से सामने आया कि मौके पर एक छह स्तर वाली इमारत और दूसरी चार मंजिला इमारत बनाई गई है, जिसकी ढलानदार छत भी रहने योग्य है। छह स्तर वाली इमारत सड़क के स्तर से ठीक ऊपर खड़ी की गई है, जिससे घाटी का दृश्य पूरी तरह बाधित हो गया है। न्यायालय ने इसे हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना नियमों के विनियम 31 का गंभीर उल्लंघन बताया, जिसे हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना (चौदहवां संशोधन) नियम, 2025 के माध्यम से संशोधित किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्य कम से कम पिछले पांच वर्षों से जारी होने के संकेत हैं। वर्ष 2020 की गूगल इमेजरी भी इस अवधि की पुष्टि करने वाले साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त खसरा संख्या 425/1 और 425/2 में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई तथा चार पेड़ों को जड़ से उखाड़ने का उल्लेख है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 30 अगस्त, 2025 को अधिसूचित पहाड़ी क्षेत्रों में कटाई और खुदाई पर प्रतिबंध के बावजूद बरसात के मौसम में भी निर्माण कार्य जारी रहा।

निर्माण पर रोक, अगली सुनवाई चार नवंबर को

हाईकोर्ट ने संबंधित स्थल पर तत्काल प्रभाव से आगे का निर्माण रोकने और नगर निगम शिमला को आवश्यक रोक-निर्माण आदेश तत्काल जारी करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय के आदेश की प्रति मौके पर मौजूद लोगों को पुलिस थाना वेस्ट के एसएचओ के माध्यम से तामील करवाई जाएगी।

एसएचओ ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि एफआईआर में आरोपियों के नाम शामिल किए जाएंगे, जांच जल्द पूरी की जाएगी और अगली सुनवाई पर अब तक की कार्रवाई का विवरण देते हुए स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।

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