स्पीति और पिन घाटी में ऊर्जा सुरक्षा, निर्बाध बिजली और हर मौसम में सड़क संपर्क पर जोर; जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को अवसरों में बदलने की पहल

ग्राम परिवेश

हिमाचल प्रदेश में विकास की सार्थकता केवल मैदानी क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार से नहीं, बल्कि उन दुर्गम सीमांत बस्तियों तक बुनियादी सेवाएं पहुंचाने से तय होती है, जहां प्रतिकूल जलवायु, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और लंबी दूरियां रोजमर्रा के जीवन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार की लाहौल-स्पीति के प्रति विकास दृष्टि इसी व्यापक सोच को रेखांकित करती है। स्पीति में बैटरी भंडारण प्रणाली से संचालित सौर ऊर्जा संयंत्र, काजा और समदो में विद्युत उपकेंद्र तथा पिन और स्पीति घाटियों में सड़क संपर्क के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी परियोजनाएं इस बात का संकेत हैं कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास को महज निर्माण कार्यों तक सीमित रखने के बजाय ऊर्जा सुरक्षा, सामरिक जरूरतों, आजीविका और आवश्यक सेवाओं की सुलभता से जोड़ने का प्रयास कर रही है। इन पहाड़ी अंचलों में बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं केवल विकास के साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ सीमांत आबादी के जीवन में सुरक्षा और भरोसा पैदा करने का आधार भी हैं।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला लाहौल-स्पीति के दुर्गम एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जनजातीय सीमावर्ती क्षेत्रों में 116.28 करोड़ रुपये की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से सरकार ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता और सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
बैटरी भंडारण प्रणाली से संचालित प्रदेश के पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी के रोंगटोंग में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली से संचालित प्रदेश के पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया। काजा में 4.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस संयंत्र की क्षमता दो मेगावाट है। इसके साथ एक मेगावाट-आवर क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी स्थापित की गई है।

समुद्र तल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस संयंत्र से प्रतिवर्ष करीब 36 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। परियोजना का निर्माण 30 मई, 2023 को शुरू हुआ था और दिसंबर, 2024 में इसका संचालन आरंभ हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 तथा वर्तमान वित्त वर्ष में 30 सितंबर, 2026 तक संयंत्र से कुल 22,58,752 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा चुका है।

यह परियोजना दर्शाती है कि अत्यधिक ठंड और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी उपयुक्त तकनीक और प्रभावी संचालन व्यवस्था के सहारे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को साकार किया जा सकता है। बैटरी भंडारण प्रणाली के समावेश से ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी मदद मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौर ऊर्जा परियोजना स्पीति घाटी में विकास की नई परिभाषा स्थापित कर रही है। उन्होंने रोंगटोंग जलविद्युत परियोजना को भी पूरी तरह कार्यशील बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि इस पर छह करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।

वर्ष 2023 में स्पीति के अपने पहले दौरे का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। सौर ऊर्जा संयंत्र का संचालन शुरू होना इन समस्याओं के समाधान और क्षेत्र की विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

काजा और समदो में 47.95 करोड़ से बनेंगे विद्युत उपकेंद्र

मुख्यमंत्री ने लाहौल-स्पीति जिले के काजा तथा किन्नौर जिले के समदो में 47.95 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 66/22 केवी विद्युत उपकेंद्रों की आधारशिला रखी। वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 100 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित ये उपकेंद्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में विद्युत अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करेंगे। इनके निर्माण से काजा, समदो और आसपास के क्षेत्रों में अधिक स्थिर, विश्वसनीय एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

वर्तमान में स्पीति घाटी को मुख्यतः किन्नौर जिले के पूह स्थित 66/22 केवी उपकेंद्र से लगभग 200 किलोमीटर लंबे 22 केवी पूह-काजा फीडर के माध्यम से बिजली उपलब्ध करवाई जाती है। फीडर की अत्यधिक लंबाई और उससे जुड़े अनेक कनेक्शनों के कारण वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, तकनीकी बिजली हानि तथा नियमित आपूर्ति बनाए रखने में कठिनाइयां आती हैं। प्रतिकूल मौसम के दौरान ये समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं।

प्रस्तावित उपकेंद्र विद्युत वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने के साथ वोल्टेज नियंत्रण में सुधार और तकनीकी हानियों में कमी लाने में सहायक होंगे। क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार, स्थानीय विकास और आवश्यक सेवाओं की बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर बिजली की मांग पूरी करने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

इन परियोजनाओं का महत्व केवल घरेलू बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा एवं सुरक्षा प्रतिष्ठानों, सामरिक अधोसंरचना, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षण संस्थानों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए भरोसेमंद विद्युत व्यवस्था अनिवार्य है। ऐसे में काजा और समदो में विद्युत उपकेंद्रों का निर्माण सीमांत क्षेत्रों की नागरिक जरूरतों और सामरिक आवश्यकताओं, दोनों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

बेहतर विद्युत अधोसंरचना से स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, प्रतिकूल जलवायु और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बिजली आपूर्ति तथा बुनियादी ढांचे के रखरखाव में आने वाली चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।
पिन घाटी में 39.55 करोड़ की सड़क से सुगम होगा आवागमन

मुख्यमंत्री ने पिन घाटी में 39.55 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चिदांग-तंगती खर तेलिंग सड़क परियोजना का भी लोकार्पण किया। इस परियोजना के तहत कच्ची सड़क को उन्नत कर बेहतर और हर मौसम में उपयोग के अनुकूल सड़क संपर्क उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्य किया गया है। इससे दूरदराज की जनजातीय बस्तियों के लोगों को अधिक सुरक्षित, सुगम और विश्वसनीय आवागमन सुविधा मिलेगी।

सड़क में सुरक्षा की दृष्टि से क्रैश बैरियर, पैरापेट, संकेतक और गति अवरोधक जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध पिन घाटी में बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ गांवों तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।

इस सड़क का लाभ कृषि अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा। विशेष रूप से हरी मटर और बीज आलू सहित स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में सुविधा होगी। बेहतर संपर्क से स्वास्थ्य केंद्रों, शिक्षण संस्थानों, प्रशासनिक कार्यालयों और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में लगने वाला समय और आवागमन संबंधी कठिनाइयां कम होने की उम्मीद है।
हिक्किम तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटन और स्वरोजगार को मिलेगा बल

मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी में 24.36 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 12 किलोमीटर लंबे तांगयुत-हिक्किम सड़क मार्ग के उन्नयन कार्य का भी लोकार्पण किया। अत्यधिक ठंड और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में सड़क संपर्क का सुदृढ़ीकरण स्थानीय आबादी की दैनिक जरूरतों के साथ आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण है।

बेहतर सड़क सुविधा से कृषि उत्पादों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में आसानी होगी तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच अधिक सुगम बनेगी। इस परियोजना से उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित अपने विशिष्ट डाकघर के लिए प्रसिद्ध हिक्किम गांव का सड़क संपर्क भी बेहतर होगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।

सड़क संपर्क में सुधार से स्थानीय लोगों के लिए पर्यटन और उससे जुड़े क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। होमस्टे, स्थानीय उत्पादों के विपणन और पर्यटकों को उपलब्ध करवाई जाने वाली सेवाओं जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने से दूरदराज की जनजातीय आबादी की आय के स्रोतों का विस्तार हो सकता है।

कुल मिलाकर, लाहौल-स्पीति में घोषित और लोकार्पित परियोजनाएं विकास को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ढालने की एक महत्वपूर्ण कोशिश हैं। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन, विद्युत वितरण व्यवस्था का विकेंद्रीकरण और दुर्गम गांवों तक बेहतर सड़क संपर्क—ये तीनों पहलू एक-दूसरे के पूरक हैं। इनका वास्तविक मूल्यांकन निर्माण कार्यों के पूरा होने से आगे, बिजली की नियमित उपलब्धता, सुरक्षित आवागमन, कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार, स्थानीय रोजगार और आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच के रूप में होगा। यदि इन सुविधाओं का प्रभावी संचालन और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित किया जाता है, तो ये परियोजनाएं सीमांत जनजातीय क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ाने के साथ वहां के लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव का आधार बन सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *