मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
शिमला : हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के तहत चयन की ओन मेरिट व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चली आ रही स्थिति अब स्पष्ट हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने 2014 में जारी अपने पूर्व निर्देशों को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य आरक्षित श्रेणियों का ऐसा अभ्यर्थी, जो आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, लिखित परीक्षा में अनुमत प्रयासों की संख्या अथवा सामान्य वर्ग की तुलना में अधिक बड़े जोन ऑफ कंसिडरेशन जैसी किसी भी छूट का लाभ लिए बिना, सामान्य अभ्यर्थियों के समान मानकों पर चयनित होता है, उसे आरक्षित पद के बजाय अनारक्षित पद पर ओन मेरिट के आधार पर समायोजित किया जाएगा। इससे आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित पद उस वर्ग के अन्य पात्र अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रहेंगे।
कार्मिक विभाग ने वीरवार को इस संबंध में आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी। प्रधान सचिव कार्मिक एम. सुधा देवी की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों तथा निगमों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों के प्रमुखों को जारी आदेश में 2011 और 2014 में जारी निर्देशों को समेकित करते हुए आरक्षण के तहत ओन मेरिट चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।
छूट ली तो चयन आरक्षित पद पर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी यदि चयन प्रक्रिया में सामान्य वर्ग के लिए उपलब्ध मानकों से किसी प्रकार की छूट का लाभ लेता है, तो उसका चयन आरक्षित रिक्ति के विरुद्ध ही माना जाएगा। इसमें आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, लिखित परीक्षा में अनुमत अतिरिक्त अवसर अथवा सामान्य वर्ग की तुलना में अधिक बड़े जोन ऑफ कंसिडरेशन जैसी छूट शामिल हैं। ऐसे अभ्यर्थी को केवल अधिक अंक प्राप्त करने के आधार पर अनारक्षित पद पर ओन मेरिट से समायोजित नहीं किया जाएगा।
यही सिद्धांत पूर्व सैनिकों, पूर्व सैनिकों के आश्रितों, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों, दिव्यांगजनों, विशिष्ट खिलाड़ियों तथा अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी के अभ्यर्थियों पर भी लागू होगा। यानी जिस श्रेणी के अभ्यर्थी ने चयन के दौरान निर्धारित विशेष छूट का लाभ लिया है, उसका चयन संबंधित आरक्षित रिक्ति के विरुद्ध ही माना जाएगा।
बिना छूट के मेरिट हासिल की तो अनारक्षित सीट
दूसरी ओर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग अथवा अन्य आरक्षित श्रेणी का कोई अभ्यर्थी यदि आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा में प्रयासों की संख्या या अन्य निर्धारित मानकों में कोई छूट लिए बिना सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के समान मानकों पर पर्याप्त अंक हासिल करता है, तो उसे आरक्षित कोटे में नहीं गिना जाएगा। उसकी नियुक्ति मेरिट के आधार पर अनारक्षित यानी खुले पद पर होगी।
सरकार के इस स्पष्टीकरण से आरक्षण व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अंतर रेखांकित होता है—समान मानकों पर हासिल की गई मेरिट अनारक्षित पद पर स्थान बनाएगी, जबकि किसी विशेष छूट का लाभ लेने वाला अभ्यर्थी संबंधित आरक्षित रिक्ति के दायरे में रहेगा। इससे आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित पदों को मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों से अलग रखते हुए उन पदों पर अन्य पात्र अभ्यर्थियों के लिए अवसर सुरक्षित रखने की व्यवस्था स्पष्ट होती है।