लाइव स्ट्रीमिंग और एडवांस्ड हाइब्रिड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू, पारदर्शिता के साथ न्यायालय की गरिमा और निजता की रक्षा पर जोर
ग्राम परिवेश
शिमला, 23 सितंबर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही अब चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगी। न्याय के मंदिर से होने वाली सुनवाई सीधे जनता तक पहुंचेगी। हाईकोर्ट में बुधवार को कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और एडवांस्ड हाइब्रिड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की औपचारिक शुरुआत हुई। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया ने इसका उद्घाटन करते हुए इसे महज तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुलभ और बदलते सामाजिक परिवेश के प्रति उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय की खुली व्यवस्था न्यायपालिका की मूल अवधारणा का हिस्सा रही है। अब तक अदालत का भौतिक कक्ष न्यायपालिका और समाज के बीच संवाद का माध्यम था, लेकिन लाइव स्ट्रीमिंग उस संवाद की सीमा को भौतिक दीवारों से आगे ले जाएगी। इससे आम लोग न्यायिक कार्यवाही को प्रत्यक्ष देख सकेंगे और उन्हें मामलों की जानकारी केवल चुनिंदा अथवा दूसरे हाथ के विवरणों पर निर्भर होकर हासिल नहीं करनी पड़ेगी। उनके अनुसार इससे संस्थागत जवाबदेही भी मजबूत होगी।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता का अर्थ प्रचार नहीं है। न्यायालय की गरिमा, गंभीरता और अनुशासन किसी भी स्थिति में कम नहीं होना चाहिए। लाइव स्ट्रीमिंग का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को तमाशा बनाना नहीं, बल्कि जनता को सार्थक और जिम्मेदार पहुंच उपलब्ध कराना है।
हिमाचल जैसे दुर्गम पर्वतीय राज्य में इस व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर व्यक्ति के लिए शिमला पहुंचकर अदालत की कार्यवाही देखना संभव नहीं होता। ऐसे में तकनीक न्याय तक पहुंच की दूरी कम करने का माध्यम बन सकती है। साथ ही यह व्यवस्था कानूनी शिक्षा और विधिक साक्षरता के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका के तकनीकी सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान शुरू हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था ने न्यायिक कामकाज के नए रास्ते खोले। अब लाइव स्ट्रीमिंग उसी यात्रा का अगला चरण है। लेकिन उन्होंने इसके साथ जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया। जनता के जानने के अधिकार और निजता एवं गरिमा के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी है। विशेष रूप से बच्चों, यौन अपराधों के पीड़ितों और वैवाहिक विवादों जैसे संवेदनशील मामलों में गोपनीयता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहनी चाहिए। इसके अलावा कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग, पुनरुत्पादन और दुरुपयोग रोकने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के तकनीकी विस्तार की कसौटी यही होनी चाहिए कि पारदर्शिता बढ़े, लेकिन निजता न घटे; पहुंच बढ़े, लेकिन गरिमा न घटे; न्यायिक प्रक्रिया खुले, लेकिन निष्पक्षता प्रभावित न हो और तकनीक आगे बढ़े, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं पवित्रता अक्षुण्ण रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल कानून के शासन में जनता के विश्वास को और मजबूत करेगी।
हाईकोर्ट की कंप्यूटर, ई-कोर्ट्स एवं एआई समिति के अध्यक्ष न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कहा कि यह पहल मुख्य न्यायाधीश की दूरदृष्टि और ई-कमेटी के सहयोग से साकार हुई है। उन्होंने न्याय के उस स्थापित सिद्धांत का उल्लेख किया कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखाई भी देना चाहिए। उनके अनुसार लाइव स्ट्रीमिंग और एडवांस्ड हाइब्रिड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह सिद्धांत अब अधिक प्रत्यक्ष रूप ले रहा है।
न्यायमूर्ति गोयल ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर शुरुआती आशंकाएं हो सकती हैं, लेकिन न्यायालय की कार्यप्रणाली जब सार्वजनिक दृष्टि के सामने होगी तो इससे न्यायपालिका में जनता का विश्वास मजबूत होगा। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट देश का नौवां या दसवां हाईकोर्ट है, जहां आधिकारिक रूप से न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हुई है।
कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश के साथ न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा, न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी, न्यायमूर्ति राकेश कैन्थला, न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज, न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा, न्यायमूर्ति चिराग भानु सिंह, न्यायमूर्ति भूपेश शर्मा और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल सहित रजिस्ट्रार जनरल विकास भारद्वाज, अन्य रजिस्ट्रार, न्यायिक अधिकारी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, अधिवक्ता तथा अन्य अतिथि उपस्थित रहे।