मोहिन्द्र प्रताप सिंह राणा

निस्संदेह, भाजपा में गुटबाजी का बीज 2022 के विधानसभा चुनाव में उसी समय पड़ गया, जब टिकट वितरण की कवायद में नड्डा, जयराम ठाकुर और अनुराग ठाकुर अपने-अपने चहेतों के टिकट की पैरवी में इस कदर आमने-सामने आए कि एक-दूसरे के खेमे के जिताऊ चेहरे का राजनीतिक क्रिया-कर्म कर डाला। टिकटों की इस खींचतान ने भीतर दबे असंतोष को बगावत की चौखट तक पहुंचा दिया और नतीजा यह हुआ कि दो दर्जन के आसपास बागी उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकते नजर आए।

प्रधानमंत्री से लेकर स्थानीय रसूखदार नेताओं तक ने इन बागियों को चुनावी मैदान से हटाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन चंद बागियों को छोड़ अधिकांश ने पीछे हटने से इनकार कर दिया। फतेहपुर के बागी उम्मीदवार कृपाल परमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत का कथित वीडियो खूब वायरल हुआ। इसमें प्रधानमंत्री मोदी परमार को चुनाव से पीछे हटने के लिए मनाते सुनाई देते हैं, जबकि परमार तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को पद से हटाने की मांग का अलाप छेड़ते सुनाई देते हैं।

इस अलाप-विलाप में भाजपा के हाथ से शायद जीती हुई बाजी निकल गई। संगठनात्मक अंतर्विरोधों से जूझती भाजपा के सामने कांग्रेस ने सत्ता का दरवाजा खोल लिया और सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार बना ली। चुनाव परिणाम ने केवल सत्ता का समीकरण नहीं बदला, बल्कि भाजपा के भीतर पहले से मौजूद गुटीय खिंचाव को भी राजनीतिक दरार में बदल दिया।

भाजपा 2022 की हार को शायद पचा नहीं पा रही थी और फरवरी 2024 के अंत में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों ने हिमाचल की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया। इस राजनीतिक कवायद के केंद्र में कांग्रेस से भाजपा में आए हर्ष महाजन रहे। राजनीतिक घटनाक्रम को देखने वालों के अनुसार, महाजन के सामने एक तीर से दो निशाने साधने की चुनौती थी—राज्यसभा की सीट जीतना और कांग्रेस सरकार को संकट में डालना। राज्यसभा चुनाव में उन्होंने 34-34 की बराबरी के बाद पर्ची से जीत दर्ज कर पहला निशाना साध लिया। छह कांग्रेस विधायकों और तीन निर्दलीयों की क्रॉस-वोटिंग से मिली यह जीत भाजपा के लिए महज राज्यसभा की एक सीट नहीं थी; इसके बाद प्रदेश की राजनीति दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संयोजन के दलदल में और गहरी उतरती चली गई।

भाजपा, जो अब तक नड्डा, जयराम और अनुराग के इर्द-गिर्द बने शक्ति-समीकरणों की गुटबाजी में उलझी थी, उसके सामने अब रमेश धवला और कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक ध्रुव भी उभरते दिखाई देने लगे। यानी गुटों की संख्या बढ़ी ही नहीं, गुटबाजी का भूगोल भी फैल गया। संक्रमण अब केवल नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं दिखता; समय के साथ उसके नए राजनीतिक केंद्र उभरते जा रहे हैं।

राजनीतिक मंच पर एक-दूसरे से गुत्थमगुत्था इन शक्ति-केंद्रों की तस्वीर भी अब अलग-अलग रंग दिखा रही है। हर्ष महाजन नड्डा के नेतृत्व में सरकार बनाने की पैरवी करते दिखाई देते हैं; मंडी में अनुराग ठाकुर समर्थक यह राजनीतिक स्वर बुलंद कर रहे हैं कि प्रदेश का नेतृत्व अनुराग जैसा होना चाहिए; सुजानपुर में जयराम ठाकुर के समर्थन की आवाज सुनाई देती है; वहीं कांगड़ा की चौधरी बिरादरी के धाकड़ नेता रमेश धवला अपनी अलग राजनीतिक लकीर खींचते हुए बगावती तेवर दिखाते रहे हैं।

यानी भाजपा के भीतर अब सवाल केवल कौन किस गुट में है, इतना भर नहीं रह गया है। सवाल यह भी है कि इन शक्ति-केंद्रों में कौन स्थायी राजनीतिक गुट का आकार ले रहा है और कौन किसी विशेष राजनीतिक प्रयोजन के लिए जुटा अस्थायी झुंड है। यही वह महीन रेखा है, जहां भाजपा की मौजूदा अंतर्कलह को केवल गुटबाजी कह देना शायद पूरी तस्वीर नहीं बताता।

हाल ही में सुजानपुर में राजेंद्र राणा की रैली के मंच की तस्वीर और सुजानपुर व बिझड़ ब्लॉक में बीडीसी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों की हार भाजपा के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर उकेरती है। सुजानपुर की रैली के मंच पर नादौन के विजय अग्निहोत्री, हमीरपुर के आशीष शर्मा, भोरंज की पूर्व विधायक कमलेश कुमारी, बड़सर के विनोद ठाकुर और सुजानपुर के राजेंद्र राणा की एक साथ मौजूदगी को महज मंच-साझेदारी मानकर नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से तस्वीर का अधूरा पाठ होगा। इन चेहरों का एक मंच पर आना कम-से-कम इतना संकेत जरूर देता है कि किसी नेता विशेष के प्रभाव के समानांतर एक नया राजनीतिक ध्रुव आकार ले रहा है।

सुजानपुर में खिंची यह महीन सियासी लकीर कब गहरी खाई का रूप लेगी, इसका जवाब आने वाला समय और रमेश धवला, रविंद्र रवि, इंद्र लखनपाल, डॉ. धीमान, केसर सिंह ठाकुर तथा वंदना योगी जैसे नेताओं के राजनीतिक रुख देंगे। बिसात बिछ चुकी है। राजा-वजीर अपनी जगह तलाश रहे हैं, हाथी-घोड़े चालें बदल रहे हैं और प्यादे रास्ते खोल रहे हैं। अब अगली बाजी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की बिसात पर होगी।

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