सुन्नी में बिना पूर्व सूचना बदली वितरण व्यवस्था, सिलेंडर लेने पहुंचे लोग लौटे खाली हाथ; डेढ़ साल से नए घरेलू कनेक्शन का भी इंतजार
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी का बिखराव रसोई गैस वितरण को शहरों से अलग व्यवस्था की मांग करता है। पहाड़ी इलाकों में एक गैस एजेंसी की पहुंच कई किलोमीटर के दायरे में फैले गांवों तक होती है। ऐसे में उपभोक्ता के घर तक हर बार सिलेंडर पहुंचाना व्यावहारिक नहीं होने के कारण एजेंसियां अपनी परिधि के विभिन्न क्षेत्रों के लिए महीने में अलग-अलग दिन निर्धारित करती रही हैं। तय दिन गैस वाहन गांव के समीप पहुंचता है और उपभोक्ता सड़क किनारे अपने खाली सिलेंडर लेकर उसका इंतजार करते हैं। जिन उपभोक्ताओं का सिलेंडर उस दिन समाप्त नहीं हुआ होता, वे अपनी सुविधा के अनुसार एजेंसी अथवा गोदाम पहुंचकर रिफिल ले आते हैं। वर्षों से चली आ रही यह व्यवस्था ग्रामीण उपभोक्ताओं और गैस एजेंसी—दोनों की व्यावहारिक जरूरतों के बीच एक संतुलन बनाती रही है।
लेकिन अब इस स्थापित व्यवस्था में बदलाव ने उपभोक्ताओं के सामने सुविधा के बजाय नई मुश्किल खड़ी कर दी है। सुन्नी तहसील में बुधवार को इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आया, जब इंडेन गैस गोदाम पहुंचे उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध नहीं करवाया गया और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। उपभोक्ताओं का कहना है कि गोदाम से सिलेंडर वितरण बंद किए जाने की उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। उन्हें इस बदलाव की जानकारी तब मिली, जब कार्यालय की चारदीवारी के भीतर चस्पा सूचना पर उनकी नजर पड़ी।
दूरदराज के गांवों से सिलेंडर लेने पहुंचे उपभोक्ताओं के लिए यह महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि समय, श्रम और आने-जाने के खर्च से जुड़ी परेशानी है। उनका सवाल है कि यदि वितरण व्यवस्था बंद करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था तो इसकी सूचना उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी। चारदीवारी के भीतर सूचना चस्पा कर देना उस उपभोक्ता तक सूचना पहुंचाने का विकल्प नहीं हो सकता, जो कई किलोमीटर दूर से सिलेंडर लेकर गोदाम पहुंचता है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आपात स्थिति में गोदाम से सिलेंडर लेने के लिए फार्म के साथ हल्फनामा देने की शर्त भी बताई जा रही है। इसके साथ यह प्रावधान बताया गया है कि ऐसा सिलेंडर लेने वाला उपभोक्ता आगे होम डिलीवरी की सुविधा नहीं ले सकेगा। ऐसे में नौकरीपेशा उपभोक्ता का दूसरे क्षेत्र में तबादला होने जैसी परिस्थितियां भी उसके लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती हैं। यानी जिस व्यवस्था का उद्देश्य गैस आपूर्ति को सुचारू बनाना होना चाहिए, वही उपभोक्ता के लिए सुविधा की जगह शर्तों और असुविधा का कारण बनती दिखाई दे रही है।
डेढ़ साल से नए कनेक्शन का इंतजार
क्षेत्रवासियों के अनुसार सुन्नी क्षेत्र में करीब डेढ़ वर्ष से नए घरेलू गैस कनेक्शन भी जारी नहीं किए जा रहे हैं। पहले से कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की परेशानी के बीच अब गोदाम से सिलेंडर वितरण बंद किए जाने से मौजूदा उपभोक्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। ऐसे में सवाल केवल सिलेंडर मिलने का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में घरेलू गैस आपूर्ति की व्यवस्था की पहुंच और जवाबदेही का है।
5 किलो का सिलेंडर भी जेब पर भारी
जरूरत के समय छोटे सिलेंडर का विकल्प मौजूद है, लेकिन उपभोक्ताओं के अनुसार 5 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत करीब 1900 रुपये तक पहुंचने से यह विकल्प आम परिवार के लिए खासा महंगा पड़ रहा है। लिहाजा नियमित घरेलू सिलेंडर की सहज उपलब्धता में बाधा आने पर छोटा सिलेंडर राहत से अधिक आर्थिक बोझ बन जाता है।
क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग और गैस एजेंसी से मांग की है कि सुन्नी क्षेत्र में गैस वितरण व्यवस्था को स्पष्ट किया जाए और किसी भी बदलाव की सूचना उपभोक्ताओं को समय रहते दी जाए। साथ ही गोदाम से सिलेंडर लेने की व्यवस्था, आपातकालीन रिफिल और होम डिलीवरी से जुड़ी शर्तों को भी स्पष्ट किया जाए। लोगों ने करीब डेढ़ वर्ष से लंबित नए घरेलू गैस कनेक्शनों को जारी करने तथा ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए नियमित, सुगम और पारदर्शी गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की है।