
फोटो इंटरनेट से ली गई है।
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला बाईपास पर फोरलेन निर्माण के दौरान चामियाणा में मकान ढहने के मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण कंपनी M/s Gawar Shimla Highway Private Limited को उत्तरदायित्व से मुक्त होने की अनुमति नहीं दी है। कोर्ट ने दोनों प्रतिवादियों को आकलित कुल प्रतिकर राशि का 50-50 प्रतिशत हिस्सा चार सप्ताह के भीतर प्रभावित मकान मालकिन रंजना देवी को अदा करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया। मामला चामियाणा निवासी चंदा देवी के पत्र से सामने आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके साढ़े तीन मंजिला भवन के साथ स्थित रंजना देवी के मकान के गिरने से उनका भवन भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होकर असुरक्षित हो गया है।
मामला शिमला बाईपास पर NH-5 से जुड़ने वाले फोरलेन मार्ग के पैकेज-II के निर्माण से संबंधित है। इस परियोजना का क्रियान्वयन NHAI की एजेंसी के माध्यम से M/s Gawar Shimla Highway Private Limited द्वारा किया जा रहा है।
₹2.23 करोड़ से अधिक का प्रतिकर निर्धारित
कोर्ट के समक्ष रखे गए आकलन के अनुसार रंजना देवी के मकान की संरचना का मूल्य ₹1,65,17,336 तथा उसमें रखे सामान का मूल्य ₹58,38,588 आंका गया है। इस प्रकार कुल प्रतिकर राशि ₹2,23,55,924 निर्धारित की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रतिकर का भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने परियोजना के निष्पादन में NHAI की संस्थागत जिम्मेदारी पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जिस फोरलेन परियोजना का निर्माण NHAI के माध्यम से हो रहा है, उसके कारण उत्पन्न घटना से प्राधिकरण स्वयं को जिम्मेदारी से अलग नहीं कर सकता। निर्माण के दौरान कटिंग उचित तरीके से की जा रही थी या नहीं तथा पर्याप्त पर्यवेक्षण और निगरानी थी या नहीं—इन प्रश्नों की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके परिणामस्वरूप चार मंजिला इमारत कुछ ही क्षणों में ढह गई।
एक साल बाद भी नहीं मिला था प्रतिकर
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि नुकसान का आकलन पिछले वर्ष जुलाई में ही कर लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद रंजना देवी को न तो ठेकेदार और न ही NHAI की ओर से अब तक एक भी पैसा भुगतान किया गया। न्यायालय ने इस विलंब को देखते हुए दोनों प्रतिवादियों को कुल निर्धारित राशि में 50-50 प्रतिशत का भुगतान चार सप्ताह के भीतर करने का आदेश दिया।
चंदा देवी के असुरक्षित मकान का भी होगा आकलन
खंडपीठ ने राज्य सरकार को चंदा देवी के उस भवन की क्षति का भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मूल्यांकन करने का निर्देश दिया है, जो पड़ोसी मकान के ढहने के बाद असुरक्षित हो गया है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 8 जून, 2022 को अधिसूचित समिति के माध्यम से राइट ऑफ वे (Right of Way) से बाहर स्थित निजी भूमि एवं भवनों को हुई क्षति के आकलन की निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस आदेश का व्यापक विधिक संकेत यह है कि विकास परियोजना की सार्वजनिक उपयोगिता अपने आप में निजी संपत्ति की सुरक्षा और प्रभावित नागरिक के वैधानिक प्रतिकर के अधिकार को निष्प्रभावी नहीं कर सकती। निर्माणाधीन सार्वजनिक परियोजना में सुरक्षा, उचित तकनीकी प्रक्रिया, पर्यवेक्षण और उससे उत्पन्न क्षति के प्रति उत्तरदायित्व समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।एक और अधिक धारदार संक्षिप्त शीर्षक हो सकता है:
“फोरलेन निर्माण में मकान ढहा, हाईकोर्ट ने NHAI-ठेकेदार पर डाला प्रतिकर का भार”