मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश 

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों की गति को और तेज करते हुए हिमकेयर योजना के अंतर्गत लंबित भुगतानों के निपटारे के लिए 100 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उपचार व्यवस्था में विश्वास, पारदर्शिता और समयबद्धता स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को उनके घर-द्वार के समीप बेहतर एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी सोच के अनुरूप पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधारों की श्रृंखला शुरू की गई है, जिसके परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

उन्होंने बताया कि अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज चमियाणा, आईजीएमसी शिमला तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इन प्रयोगशालाओं में रक्त के एक ही नमूने से अनेक प्रकार की जांच संभव हो सकेगी, जिससे मरीजों को त्वरित एवं सटीक निदान उपलब्ध होगा। इन प्रयोगशालाओं के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद तथा टांडा और हमीरपुर चिकित्सा महाविद्यालयों में पीईटी स्कैन मशीनें स्थापित करने हेतु निविदा प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये व्यय कर रही है। यह निवेश केवल मशीनों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य संरचना को तकनीकी रूप से सशक्त और भविष्य उन्मुख बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के अस्पतालों में विश्वस्तरीय तकनीक उपलब्ध करवाकर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करना है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य महत्वपूर्ण जांचों के लिए प्रतीक्षा अवधि को शून्य करने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सके। उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालयों में बड़ी शल्य चिकित्सा (मेजर सर्जरी) के लिए भी ‘शून्य प्रतीक्षा अवधि’ सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था से निकालकर त्वरित और परिणामोन्मुख प्रणाली में बदलने का संकेत मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सकों, पैरामेडिकल तथा तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है ताकि मानव संसाधन की कमी मरीजों के उपचार में बाधा न बने। उन्होंने दोहराया कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जनकल्याणकारी क्षेत्रों में विशेषज्ञ एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है और इस दिशा में हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

बैठक में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और ब्रांडेड दवाइयां उपलब्ध करवाने के विषय पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में ठोस व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। इसके लिए राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम को दवाओं की खरीद की जिम्मेदारी सौंपने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों सुनिश्चित की जा सकें।

बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, सचिव पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सुशील कुमार सिंगला, विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. अश्वनी शर्मा, राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में यह पहल केवल वित्तीय निवेश नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के निर्माण का प्रयास है जिसमें मरीज को इलाज के लिए प्रतीक्षा, भुगतान अटकने या संसाधनों की कमी जैसी बाधाओं का सामना न करना पड़े। हिमकेयर के बकाये भुगतान से लेकर ‘शून्य प्रतीक्षा’ उपचार मॉडल तक, सरकार की यह रणनीति स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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