
फोटो नेट से ली गई है
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ ग्राम परिवेश
“टीबी हारेगा, देश जीतेगा” के राष्ट्रीय अभियान के बीच तपेदिक को लेकर जमीनी सच्चाई एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। शिमला ज़िले के रामपुर खनेरी स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल नर्सिंग कॉलेज में 90 में से 19 छात्राओं—यानी करीब 21%—में टीबी के लक्षण पाए जाने की जानकारी सामने आई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार यह स्थिति संभावित “आउट ब्रेक” का संकेत देती है।
संस्थान का आधिकारिक पक्ष अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन अभिभावकों के बयान इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को उजागर कर रहे हैं। आरोप है कि जहां वैज्ञानिक जांच—जैसे स्पूटम टेस्ट, सीबीएनएएटी और चेस्ट एक्स-रे—प्राथमिकता होनी चाहिए थी, वहीं प्रबंधन समिति अभिभावकों से ₹3600 “देवता के प्रकोप” को शांत करने के नाम पर वसूल रही है। विज्ञान और अंधविश्वास के इस टकराव ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
एक अभिभावक, जो विलासपुर के निवासी हैं, ने बताया कि उनकी बेटी पिछले चार–पाँच महीनों से तपेदिक से जूझ रही है और उपचाराधीन है। उनका कहना है कि कॉलेज में “दहशत का माहौल” है—छात्राएँ मानसिक दबाव में हैं और पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावक ने आरोप लगाया कि छात्रों को “देवता के नाम” पर डराकर पैसे लिए जा रहे हैं और वास्तविक चिकित्सा देखभाल को नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही, कॉलेज में भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए—“जब स्वास्थ्य और पोषण ही असुरक्षित हो, तो पढ़ाई कैसे संभव है?”

इसी बीच, डॉ जनक राज , विधायक भरमौर, ने एक वीडियो बयान में दावा किया कि प्रभावित 19 छात्राओं में से 4 एमडीआर (मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट) श्रेणी में हैं। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो स्थिति और अधिक जटिल और गंभीर हो सकती है, क्योंकि एमडीआर-टीबी का उपचार लंबा, महंगा और चिकित्सकीय रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रबंधन समिति पर यह भी आरोप है कि हॉस्टल और कक्षाओं में भीड़भाड़, खराब वेंटिलेशन और संक्रमण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी की गई। संदिग्ध छात्राओं को निर्धारित एसओपी के अनुसार पृथक न रखने से जोखिम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि ये आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो यह केवल चूक नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही का गंभीर मामला बन सकता है।
रामपुर क्षेत्र से जुड़े भाजपा नेता कॉल सिंह नेगी ने भी कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक जांच में कई खामियां सामने आई हैं और एसडीएम स्तर की जांच में करीब 20 बिंदुओं पर गड़बड़ी की ओर संकेत किया गया है, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और डॉ जनक राज ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है, जिससे बहस अब स्वास्थ्य से आगे बढ़कर जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता तक पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है—स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लाना। व्यापक स्क्रीनिंग, पारदर्शी जांच और सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का सख्ती से पालन ही इस संभावित संकट को थाम सकता है।
अंततः प्रश्न यही है—क्या “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” का संकल्प केवल नारा बनकर रह जाएगा, या जमीनी स्तर पर भी उसकी प्रतिबद्धता उतनी ही मजबूत दिखाई देगी?