
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
दिनांक: 01 मई 2026
हिमाचल प्रदेश की पर्वतीय धमनियों में बहती सतलुज के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन की रफ्तार को परखने हेतु भारत सरकार के विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल ने आज एसजेवीएन की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं का व्यापक अवलोकन किया। उनके साथ अपर सचिव (हाइड्रो एवं ईसी एंड ईटी) श दिवाकर नाथ मिश्रा तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के सदस्य (हाइड्रो) मिलिंद गणेश गोखले भी मौजूद रहे।
इस दौरे के दौरान 1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी, 210 मेगावाट लूहरी-1, 412 मेगावाट रामपुर तथा 382 मेगावाट सुन्नी बांध परियोजनाओं के संचालन, प्रगति और तकनीकी मानकों की सूक्ष्म समीक्षा की गई—मानो ऊर्जा उत्पादन की हर धड़कन को परखा जा रहा हो।
एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता, निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा, निदेशक (वित्त) पार्थजीत डे तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत करते हुए परियोजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों से अवगत कराया।

नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन में सचिव ने विद्युत गृह का निरीक्षण कर न केवल रखरखाव की उत्कृष्ट प्रणालियों को समझा, बल्कि उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता के मानकों को भी परखा। वहीं रामपुर परियोजना में पर्यावरणीय संतुलन के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देते हुए पौधारोपण कर विकास और प्रकृति के सह-अस्तित्व की भावना को सुदृढ़ किया।
लूहरी-1 परियोजना में निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने बांध, विद्युत गृह और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल संयंत्रों की प्रगति का गहन अवलोकन किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों के बीच समयबद्धता, गुणवत्ता और सुरक्षा के संतुलन को बनाए रखने पर विशेष बल देते हुए उन्होंने परियोजना टीम को लक्ष्यों के अनुरूप कार्य पूर्ण करने हेतु प्रेरित किया।
सुन्नी बांध परियोजना में खैरा क्षेत्र में सतलुज पर निर्मित डबल-लेन स्टील ट्रस ब्रिज का उद्घाटन इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। यह पुल न केवल निर्माण गतिविधियों को गति देगा, बल्कि मंडी और शिमला जिलों की दूरस्थ पंचायतों को जोड़ते हुए स्थानीय जीवन-प्रवाह में भी नई ऊर्जा का संचार करेगा—विकास को जमीन से जोड़ने की एक ठोस पहल के रूप में।
अपने संबोधन में अग्रवाल ने एसजेवीएन की टीम के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं केवल ऊर्जा उत्पादन के केंद्र नहीं, बल्कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा आत्मनिर्भरता की आधारशिला हैं।

यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि केंद्र सरकार जलविद्युत क्षेत्र को सुदृढ़ करने और हरित ऊर्जा के विस्तार को तीव्र गति देने के लिए प्रतिबद्ध है—जहां विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि पहाड़ों, नदियों और जनजीवन के समन्वय में परिलक्षित होता है।