
5 फीसदी आरक्षण रोस्टर तय करने का उपायुक्तों को अधिकार देने पर विपक्ष नाराज
31 मई से पहले होंगे पंचायत चुनाव: सुक्खू
ज्ञान ठाकुर
शिमला, 01 अप्रैल।
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव में रोस्टर को लेकर सुक्खू सरकार द्वारा जारी अधिसूचना विपक्षी दल भाजपा को रास नहीं आई है। भाजपा ने इस मुद्दे पर बुधवार को प्रदेश विधानसभा में पहले भारी हंगामा किया जिस पर सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर से आरंभ होने पर विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका दिया गया लेकिन जब सरकार ने विपक्ष की इस मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव की मांग को नहीं माना तो विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।
विपक्षी दल भाजपा की ओर से विधायक रणधीर शर्मा ने आज सुबह विधानसभा अध्यक्ष को नियम-67 के तहत पंचायत चुनाव में रोस्टर के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्यवस्था दी वह प्रश्न काल के बाद इस पर अपना निर्णय सुनाएंगे। लेकिन विपक्ष प्रस्ताव को मंजूर करने पर जोर देता रहा। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही फिर से आरंभ होने पर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में उपायुक्तों को भौगोलिक और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सदस्यों के रोस्टर में 5 फीसद तक बदलाव करने का अधिकार देकर संविधान के अनुच्छेद 243 (डी) की अवहेलना की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा कर संविधान की धज्जियां उड़ाई है। रणधीर शर्मा ने ये भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस अधिसूचना के बारे में चुनाव आयोग से भी कोई बातचीत नहीं की और न ही लोगों की आपत्तियों ली गई तथा रात के अंधेरे में अधिकारियों को बुलाकर अधिसूचना जारी कर दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार की इस अधिसूचना से आरक्षण की मूल भावना भी आहत हुई है। इसलिए इस मुद्दे पर नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा करना जरूरी है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार चुनाव नहीं करना चाहती, इसलिए ये अधिसूचना जारी की गई है।
सरकार की ओर से राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने दलील पेश दी कि पंचायत चुनाव वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर हो रहे हैं। ऐसे में कई जातियों और वर्गों की जनसंख्या में बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा कि रोस्टर में 5 फीसद बदलाव का प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि जहां किसी समुदाय विशेष के साथ जनसंख्या में आए बदलाव के कारण अन्याय हुआ हो, वहां उपायुक्त रोस्टर में कुछ बदलाव कर सके। उन्होंने इस मुद्दे पर नियम;67 के तहत चर्चा का विरोध किया और कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पहले से ही मई तक पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने रोस्टर में 5 फीसद बदलाव की विंडो इसलिए रखी है ताकि मुख्यमंत्री अपने कुछ और मित्रों को प्रधान अथवा जिला परिषद और बीडीसी का सदस्य बना सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नेचुरल जस्टिस को ही नकार रही है और मुख्यमंत्री वास्तव में पंचायत चुनाव ही नहीं करवाना चाहते हैं। इसीलिए पहले सरकार ने डिजास्टर एक्ट लगाया, फिर सरकार हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट चली गई और अब रोस्टर लगाकर फिर से लोगों के लिए अदालत जाने का दरवाजा खोल दिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार का नियमों और कायदों में विश्वास होता तो उसे चुनाव टालने की नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी है तभी से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष की दलीलों का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 31 मई से पहले ही होंगे। उन्होंने दावा किया कि संविधान के अनुच्छेद 73 के तहत प्रदेश सरकार को रोस्टर में बदलाव करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम राजनीति करना नहीं बल्कि प्रदेश की व्यवस्था बदलने का है।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्यवस्था दी कि मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री द्वारा पेश की गई दलीलों में दम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उपायुक्तों को रोस्टर में 5 फीसदी बदलाव की जो शक्तियां दी है वह सही है। इसलिए इस मुद्दे पर नियम-67 के तहत काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है।
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विधानसभा अध्यक्ष ने बदली अपनी व्यवस्था
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने आज व्यवस्था दी की विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान नवंबर में उन्होंने नियम-67 के तहत चर्चा को लेकर जो व्यवस्था दी थी, वह उसे बदल रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नई व्यवस्था के अनुसार नियम-67 के तहत चर्चा मांगे जाने पर अब इस नियम के तहत सदन की कार्यवाही आरंभ होने के समय से ही चर्चा की शुरुआत कर दी जाएगी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष ने नवंबर में व्यवस्था दी थी कि नियम-67 के तहत चर्चा मंजूर होने पर इस मुद्दे पर प्रश्न काल के बाद ही चर्चा आरंभ होगी।