खुशी राम ठाकुर 

दूर-दराज, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों के विकास की घोषणाएँ हर सरकार के एजेंडे में अवश्य रहती हैं, पर जमीनी हकीकत अक्सर उन घोषणाओं की पोल खोल देती है। योजनाएँ कागज़ों पर आकार लेती हैं, भवन बन भी जाते हैं, पर उनमें जीवन फूंकने वाली नियुक्तियाँ वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी रहती हैं। परिणामस्वरूप, जनजातीय अंचलों के किसान और बागवान सुविधाओं के नाम पर केवल ताले जड़े दफ्तरों को निहारते रह जाते हैं। छोटा भंगाल की मुल्थान घाटी में कृषि और बागवानी विभाग के कार्यालयों पर लटके ताले इसी उपेक्षा की मूक गवाही दे रहे हैं—यह बताने के लिए कि सत्ता बदलती रही, पर व्यवस्था की संवेदनहीनता जस की तस बनी हुई है।

इसी पृष्ठभूमि में बरोट से खुशी राम ठाकुर की यह रिपोर्ट जनजातीय अंचल की उस पीड़ा को सामने लाती है, जहाँ संस्थान तो स्थापित हैं, पर सेवाएँ अनुपस्थित हैं।

बरोट– छोटा भंगाल घाटी के समस्त किसानों व बागवानों की सुविधा के लिए भले ही सरकार ने घाटी के केंद्र स्थल मुल्थान में फल संतति एवं उद्यान प्रसार केंद्र तथा कृषि प्रसार केंद्र स्थापित कर रखे हैं, लेकिन घाटीवासियों को इन दोनों सरकारी संस्थानों की सुविधा नाममात्र ही मिल रही है। मुल्थान पंचायत की प्रधान दुर्गेश कुमारी तथा पंचायत के ही दयोट गाँव की निवासी एवं पूर्व बीडीसी उपाध्यक्षा कमलेश कुमारी ने बताया कि कृषि प्रसार केंद्र मुल्थान लगभग पाँच वर्षों से ताले में जकड़ा हुआ है। वहीं फल संतति एवं उद्यान प्रसार केंद्र में लगभग चार वर्षों से एचडीओ का पद रिक्त चल रहा है।

स्थिति की विडंबना यह रही कि यह उद्यान केंद्र लगभग तीन वर्षों तक केवल एक महिला चौकीदार के भरोसे चलता रहा। दिसंबर 2024 में उसके सेवानिवृत्त होने के बाद से लगभग एक वर्ष से इस केंद्र में भी स्थायी रूप से ताला लटका हुआ है। इतने वर्षों के बावजूद न तो कृषि प्रसार अधिकारी की नियुक्ति हो पाई है और न ही उद्यान विभाग में एचडीओ सहित अन्य पदों को भरा गया है।

दोनों जनप्रतिनिधि महिलाओं का कहना है कि घाटीवासियों के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है, जहाँ कृषि और बागवानी जैसे आजीविका के मूल आधार विभाग ही निष्क्रिय पड़े हों। उन्होंने स्थानीय विधायक किशोरी लाल, कृषि विभाग और उद्यान विभाग के उच्चाधिकारियों से पुनः मांग की है कि घाटी के किसानों और बागवानों की सुविधा के लिए कृषि प्रसार केंद्र में रिक्त कृषि प्रसार अधिकारी तथा फल संतति एवं उद्यान प्रसार केंद्र मुल्थान में एचडीओ सहित अन्य खाली पदों को तुरंत भरा जाए, ताकि वर्षों से जमी उपेक्षा की परतें हट सकें और जनजातीय क्षेत्र को वास्तविक राहत मिल सके।

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