
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर जिला शिक्षा, शौर्य और शासकीय योगदान की दृष्टि से लंबे समय से राज्य की रीढ़ रहा है, किंतु विडंबना यह रही कि राष्ट्रीय स्तर के बड़े संस्थानों के वितरण में यह जिला बार-बार सत्ता-तंत्र की स्मृति से बाहर कर दिया गया। प्रदेश में एम्स, केंद्रीय व प्रांतीय विश्वविद्यालय, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, आईआईटी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और हाइड्रो इंजीनियरिंग जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हुए—और कुछ जिलों में तो ये संस्थान विकास के प्रतीक नहीं, बल्कि संख्यात्मक विशेषाधिकार बन गए।
इसके विपरीत, हमीरपुर दशकों तक केवल अतीत की दो स्मृतियों पर संतोष करने को विवश रहा—प्रताप सिंह कैरों के काल में रूप सिंह फूल के आग्रह से मिला एक पॉलिटेक्निकल कॉलेज और ठाकुर जगदेव चंद के दौर का बस अड्डा, जिस पर ‘नाज़’ तो किया गया, पर आगे की दृष्टि नहीं दी गई। यह स्थिति मात्र क्षेत्रीय असंतुलन नहीं, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकताओं की गंभीर दृष्टिहीनता को भी उजागर करती है।
ऐसे परिदृश्य में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में एक अत्याधुनिक राज्य स्तरीय कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने का निर्णय उस ऐतिहासिक उपेक्षा को पहचानने और सुधारने की सार्थक पहल के रूप में सामने आता है। प्रस्तावित 264 बिस्तरों की क्षमता वाला यह समर्पित कैंसर केंद्र केवल एक भवन नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य नीति में गुणात्मक परिवर्तन का संकेत है। इस केंद्र में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, गायने ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पेन पैलिएशन, एनेस्थीसियोलॉजी व क्रिटिकल केयर, ऑन्को पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी इमेजिंग तथा स्टेम सेल व बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन जैसे 11 विशेषज्ञ विभाग स्थापित किए जाएंगे, जो कैंसर रोगियों को एक ही परिसर में समग्र, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराएंगे।
मुख्यमंत्री ने जिस स्पष्टता से राज्य में बढ़ते कैंसर मामलों के मद्देनज़र प्रणालीगत स्क्रीनिंग, रोकथाम, निगरानी, रिकॉर्डिंग और समय पर जांच की आवश्यकता को रेखांकित किया है, वह सरकार की तात्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य-दृष्टि को दर्शाता है। प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों से लेकर उच्च स्तरीय कैंसर देखभाल केंद्रों के समन्वित विकास पर बल, पर्याप्त व प्रशिक्षित मेडिकल–पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था, आधुनिक मशीनरी की स्थापना और एम्स दिल्ली की तर्ज पर पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन जैसे कदम यह स्पष्ट करते हैं कि यह निर्णय केवल हमीरपुर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मजबूत, संवेदनशील और सुलभ कैंसर उपचार प्रणाली की नींव रखने वाला है। उत्तर-पूर्वी राज्यों के बाद प्रदेश में उच्च कैंसर दर को लेकर व्यक्त की गई मुख्यमंत्री की चिंता और उसके समाधान के लिए ठोस संस्थागत पहल, इस निर्णय को मानवीय संवेदना, क्षेत्रीय न्याय और संतुलित विकास—तीनों कसौटियों पर खरा सिद्ध करती है।