आपदा राहत मंत्री पैदल भरमौर पहुंचे, छह हजार श्रद्धालुओं को घर लौटाया गया।

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मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ ग्राम परिवेश
शिमला, प्रकृति के क्रोध के बीच जब मणिमहेश यात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु जान के संकट में फंसे, तब हिमाचल सरकार और प्रशासन ने दिन-रात एक कर उन्हें मौत के मुंह से खींचकर सुरक्षित घर पहुंचाने का काम किया। यह केवल राहत नहीं, बल्कि जज्बे, साहस और मानवीय कर्तव्य का असाधारण उदाहरण बन गया।
सबसे उल्लेखनीय रहा आपदा राहत मंत्री जगत सिंह नेगी का साहस, जिन्होंने कागजी निर्देशों तक सीमित न रहते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की फंसे लोगों के प्रति बढ़ती चिंता को दूर करने के लिए खुद पैदल भरमौर की ओर कदम बढ़ाए। चम्बा से भरमौर का सफर लगभग 62 किलोमीटर का है जिसमें मंत्री नेगी ने लगभग 15 से 20 किलोमीटर कठिन पहाड़ी रास्तों और विपरीत परिस्थितियों को पार कर वे पीड़ितों के बीच दो दिन पहुंचे, ढांढस बंधाया और राहत कार्यों की गति तेज की। उनके इस कदम ने न सिर्फ प्रशासन को नई ऊर्जा दी, बल्कि फंसे हुए यात्रियों में भी भरोसा जगाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में जानकारी दी कि अब तक करीब 6000 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर नूरपुर और पठानकोट पहुंचाया जा चुका है।चंबा में 60 अतिरिक्त बसें तैनात की गईं, और कलसुंई से लेकर पठानकोट व कांगड़ा तक यात्रियों को निगम व निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से भेजा गया।
भरमौर में अब भी लगभग 5000 और चंबा चौगान में करीब 500 यात्री बचे हैं, जिन्हें लंगेरा सड़क बहाल होते ही उनके गंतव्यों की ओर रवाना कर दिया जाएगा। प्रशासन ने बताया कि चंबा-भरमौर मार्ग कलसुंई और राजेरा तक तथा जोत मार्ग गेट तक बहाल कर दिया गया है।**
लाहौल-स्पीति में भी प्रशासन ने युद्धस्तर पर काम करते हुए पागल नाला को खोल दिया, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। अटल टनल से होकर तेल टैंकर केलंग भेजे गए हैं और रोहतांग से अलेओ सड़क छोटे वाहनों के लिए खोल दी गई है। वहीं, कुल्लू-मनाली मार्ग, बंजार क्षेत्र और संचार सेवाओं को भी बहाल किया गया है।
यह संपूर्ण राहत अभियान बताता है कि जब हालात विकट हों, तो सरकार और प्रशासन यदि पूरे समर्पण व जिम्मेदारी से काम करें तो आपदा भी मात खा जाती है। जगत सिंह नेगी के साहस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने हजारों श्रद्धालुओं की जिंदगी बचाकर हिमाचल की संवेदनशील शासन-व्यवस्था की एक जीवंत मिसाल पेश कर दी है।