मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया निर्णय केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की उस ठोस संरचना के स्तंभ हैं, जिसकी तलाश सत्ता संभालते ही शुरू हो गई थी। “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” के रूप में बेसहारा बच्चों को राज्य की जिम्मेदारी बनाना जहां सामाजिक समरसता का संवेदनशील विस्तार है, वहीं कृपा-भोग नियुक्तियों पर कैंची चलाना सत्ता के अनावश्यक विशेषाधिकारों पर सीधा प्रहार है।

राजनीतिक परिदृश्य में, जहां जनप्रतिनिधियों की निष्ठा का मूल्यांकन “प्राइस टैग” से होने लगा हो और उन्हें सुरक्षित रखने के नाम पर लोकतंत्र को रिसॉर्ट्स की चारदीवारी में कैद कर करोड़ों बहाए जाते रहे हों—ऐसे समय में पद और पैसा छीनने का निर्णय केवल वित्तीय अनुशासन नहीं, बल्कि राजनीतिक शुचिता की पुनर्स्थापना है। यह संदेश स्पष्ट है कि सत्ता अब सुविधा नहीं, बल्कि जवाबदेही का माध्यम बनेगी।

वित्तीय मोर्चे पर भी सरकार ने संकट को अवसर में बदलने का प्रयास किया है। सीमित संसाधनों, बढ़ते दायित्वों और वित्तीय दबावों के बीच प्राथमिकताओं का पुनर्संतुलन यह दर्शाता है कि सरकार केवल खर्च नहीं, बल्कि सोच का पुनर्गठन कर रही है।

किन्तु व्यवस्था परिवर्तन की सबसे जटिल और अक्सर उपेक्षित कड़ी—प्रशासकीय ढांचा—अब भी सुधार की प्रतीक्षा में है। यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति का अगला कदम प्रशासकीय गलियारों में वर्षों से जड़ें जमा चुकी ओएसडी/ओडीआई संस्कृति पर प्रहार करता है, तो यह बदलाव सतही न रहकर शासन की आत्मा तक पहुंचेगा।

वीरवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश 40461.95 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित कर दिया। सदन द्वारा पारित अनुपूरक बजट में 36374.61 करोड़ रुपये राज्य स्कीमों के लिए और 4087.34 करोड़ रुपये केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के लिए रखा गया है। राज्य स्कीमों के अंतर्गत 26194.95 करोड़ रुपये वेज एंड मिनस और ओवरड्राफट के लिए रखे गए हैं, जबकि 4150.14 करोड़ रुपये विद्युत उत्पादन और बिजली बोर्ड को उदय योजना के तहत उपलब्ध करवाए गए ऋण को इक्विटी में बदलने, क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों की मरम्मत, 818.20 करोड़ रुपये प्राकृतिक आपदा राहत, 785.22 करोड़ रुपये जलापूर्ति एवं मल निकासी योजनाओं, 657.22 करोड़ रुपये हिमकेयर, सहारा योजना, चिकित्सा महाविद्यालय शिमला, टांडा, हमीरपुर, नेरचैक और चमियाणा में रोबोटिक सर्जरी, टांडा, हमीरपुर और चमियाणा में उन्नत परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना, हमीरपुर और टांडा के लिए पैट स्कैन की खरीद, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर और विभिन्न अस्पतालों के निर्माण कार्यों तथा एम्स बिलासपुर के लिए विद्युत आपूर्ति, 555.89 करोड़ विशेष केन्द्रीय सहायता के तहत सब्जी मंडी शिमला और नगर परिषद हमीरपुर में शाॅपिंग काम्पलेक्स, हमीरपुर में एचआरटीसी बस अड्डे, खलीनी शिमला में फलाई ओवर, छोटा शिमला से विल्ली पार्क तक अंडर ग्राउंड यूटिलिटी डक्ट के निर्माण और स्कैंडल प्वाइंट पुस्तकालय के सुदृढीकरण के लिए रखे गए हैं।

इसके अलावा 453.63 करोड़ सड़कांे के रखाव, पुलों, ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मुआवजे, 443.33 करोड़ हिमाचल पथ परिवहन निगम को यात्रियों की विभिन्न श्रेणियों को किराए में दी जा रही छूट के एवज में उपदान, हमीरपुर में बस अड्डे और सिरमौर में भवन के निर्माण तथा इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, 262.16 करोड़ 15वें वित्तायोग के अंतर्गत ग्रामीण स्थानीय निकायों को सहायता अनुदान, सामुदायिक केन्द्रों के निर्माण, 244.31 करोड़ स्कूल भवनों, राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज सुलह, राजीव गांधी राजकीय अभियान्त्रिकी कॉलेज और आईटीआई नगरोटा बगवां में भवनों तथा नादौन (हमीरपुर), नाहन (सिरमौर), बैजनाथ (कांगड़ा), कल्पा में इंडोर स्टेडियमों के निर्माण, 221.53 करोड़ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के मानदेय, मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष, मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना, मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना, लुथान कांगड़ा में सुख आश्रय परिसर एवं विभिन्न जिलों में शिशु देखभाल केन्द्रों के निर्माण और पैंशनरों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति,

192.20 करोड़ नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स बटालियन मुख्यालय बैहना मंडी के लिए सड़क निर्माण तथा मशीनरी व उपकरणों की खरीद, 186.73 करोड़ नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी घंडल में न्यायिक अवसंरचना के उन्नयन, छात्रा छात्रावास, राजस्व भवनों, जेल भवनों, राज्य के विभिन्न स्थानों पर कंबाईंड आफिस बिल्डिंग, नई दिल्ली स्थित द्वारका में राज्य अतिथि गृह और हिमाचल भवन चंडीगढ़ के निर्माण, 148.24 करोड़ नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स बटालियन बैहना मंडी की स्थापना, 108.17 करोड़ न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में एसजीएसटी रिंबरसमेंट और 104.65 करोड़ जाईका प्रोजेक्ट के लंबित दायित्व और एचपी शिवा प्रोजेक्ट के लिए प्रावधित किए गए हैं।

इसके अलावा केन्द्रीय प्रायोजित स्कीमों के अंतर्गत अधिकतर राशि चालू तथा नई विकास योजनाओं, जिनके लिए केंद्र सरकार से इस वर्ष के दौरान धनराशि प्राप्त हुई, के लिए प्रस्तावित है। 2453.97 करोड़ एनडीआरएफ से प्राप्त आपदा प्रबंधन के लिए, 688.40 करोड़ प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, 352.18 करोड़ रेणुकाजी बांध विस्थापितों को मुआवजे, 82.45 करोड़ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), 68.30 करोड़ मनरेगा, 55.50 करोड़ फिनासिंह परियोजना, 36.66 करोड़ राष्ट्रीय आयुष मिशन, 36.17 करोड़ पीएम अभीम, 33.37 करोड़ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और 25 करोड़ धर्मपुर निर्वाचन क्षेत्र में सकरैन, मलथोड़, थोथू, डोल और समौर खड्डु के कटाव रोधी उपायों के लिए प्रस्तावित है।

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