
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ ग्राम परिवेश
प्रदेश के किसानों—विशेषकर ग्रामीण अंचलों की महिलाओं—को पुनः सम्मानित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त खेती की ओर अग्रसर करने के लिए राज्य सरकार ने एक और ठोस पहल की है। पारंपरिक किसानी को औषधीय मूल्य, बाजार की सुनिश्चितता और वैज्ञानिक मार्गदर्शन से जोड़ते हुए भरोसेमंद कॉरपोरेट संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह केवल एमओए पर हस्ताक्षर भर नहीं, बल्कि खेती को घाटे के चक्र से निकालकर गरिमा और गारंटी के दायरे में लाने की रणनीतिक शुरुआत है—जहाँ खेत, जंगल और बाजार एक-दूसरे के पूरक बनें, प्रतिद्वंद्वी नहीं।
इसी व्यापक दृष्टि के साथ जलवायु संकट की गंभीर चुनौतियों और हरित अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को केंद्र में रखकर आज एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की गई और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए दो अहम समझौते हस्ताक्षरित हुए। यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका—दोनों को साथ लेकर चलने की नीति अब घोषणाओं से आगे बढ़कर क्रियान्वयन की दिशा में है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन-डाईऑक्साइड एमीशंसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अप्रत्याशित बादल फटने की घटनाएं, अचानक बाढ़, भूस्खलन और सिकुड़ते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए बताया कि इस प्राकृतिक विपदा में 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए, जो हिमालयी संवेदनशीलता की गंभीर चेतावनी है।
इस अवसर पर मैसर्स डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) हस्ताक्षरित किए गए।
पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों—ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर और निचले शिमला क्षेत्र—में आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियाँ वितरित की जाएंगी। मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों—कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर—में जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और पुष्करमूल के पौधे दिए जाएंगे, जबकि अल्पाइन प्रजातियाँ जैसे अतीस और विष किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के उच्च क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएंगी। यह वितरण केवल रोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और आय-विविधीकरण की समन्वित योजना है।
दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पाँच वर्षों के लिए हस्ताक्षरित हुआ है। इसके अंतर्गत सोलन जिले में चयनित औषधीय प्रजातियों—हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता) और हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू)—की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को जोड़ा जाएगा, जिससे महिलाओं की भागीदारी केवल श्रम तक सीमित न रहकर स्वामित्व और आय-सृजन तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है और युवाओं को सौर परियोजनाओं हेतु सब्सिडी प्रदान की जा रही है। नालागढ़ में ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी बन सके।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देते हुए अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है तथा 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल केवल एक भौगोलिक भू-भाग नहीं, बल्कि हिमालय की आत्मा है। यहाँ के ग्लेशियर, नदियाँ और वन न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की जीवन-रेखा हैं। हिमालय में अस्थिरता के दुष्परिणाम व्यापक होंगे। उन्होंने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के समाधान तक किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा, हालांकि इस विषय पर सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए हैं।
इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, आईजीएसडी इंडिया प्रोग्राम की डायरेक्टर ज़ेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
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