
ज्ञान ठाकुर
शिमला, 17 फरवरी। विधानसभा के प्रश्नकाल में आज उस समय सियासी तापमान बढ़ गया जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट और ऊना जिले के गगरेट क्षेत्र में कथित बेनामी जमीन सौदों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की घोषणा की। यह ऐलान गगरेट के विधायक राकेश कालिया के प्रश्न के उत्तर में किया गया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन दोनों क्षेत्रों में भूमि खरीद-फरोख्त के दौरान यदि बेनामी लेन-देन या दलाली के प्रमाण सामने आए, तो संबंधित जमीन जब्त की जाएगी और किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जांच में दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उनके शब्दों में यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता का प्रश्न है।
उन्होंने दोहराया कि प्रदेश में बाहरी व्यक्तियों को जमीन खरीदने की अनुमति केवल हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार एवं भू-धारण अधिनियम, 1972 की धारा 118 के तहत ही दी जाती है। ऐसे में यदि इस प्रावधान की आड़ में कोई अनियमितता हुई है, तो उसकी तह तक जाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विधायक से उपलब्ध दस्तावेज एसआईटी को सौंपने का आग्रह भी किया, ताकि जांच तथ्यपरक और निष्पक्ष हो सके।
मूल प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण हेतु प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के अंतर्गत अब तक 4649 प्रभावितों को 1460 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। यह भुगतान भू-अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।
इसी दौरान विधायक राकेश कालिया ने एक पूर्व उत्तराखंड अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह स्थानीय लोगों का शोषण कर रहा है तथा आठ लाख रुपये के कथित फ्रॉड की शिकायत के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उक्त अधिकारी प्रदेश की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करने के प्रयासों से जुड़ा रहा है। प्रश्नकाल का यह हिस्सा केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक शुचिता के व्यापक प्रश्नों को भी सामने ले आया।
शिमला में डक्ट परियोजना सुरक्षित, शहर को मिलेगी खुदाई से राहत**
मुख्यमंत्री ने विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि शिमला में बिजली, टेलीकॉम तारों और जलापूर्ति पाइपों के लिए निर्मित की जा रही डक्ट परियोजना पूरी तरह सुरक्षित है। इससे शहर को किसी प्रकार का संरचनात्मक नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि डक्ट के पूर्ण होने के बाद सड़कों की बार-बार खुदाई की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और शहर तारों के जंजाल से मुक्त होगा।
सरकार इस परियोजना में गुणवत्ता सुनिश्चित करने का दावा कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सब्जी मंडी क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य जारी है, जबकि माल रोड और लोअर बाजार में डक्ट निर्माण को लेकर अध्ययन चल रहा है। उनके अनुसार, यह पहल केवल आधारभूत ढांचे का सुधार नहीं, बल्कि शिमला की सौंदर्य दृष्टि को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।
एफआरए मद में भी खर्च हो सकेगा विधायक निधि का धन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब वनाधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत देय राशि जमा कराने के लिए विधायक निधि से भी धनराशि जारी की जा सकेगी। इसके लिए शीघ्र अधिसूचना जारी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि विधायक निधि की शेष किस्तें जारी करने पर विपक्ष के साथ विमर्श किया जाएगा, विशेषकर आरडीजी को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में। साथ ही विपक्ष को यह भी आगाह किया कि विधायक निधि से संबंधित अनुशंसा पत्रों की संख्या संयमित रखी जाए।
प्रश्नकाल के दौरान सरकार का रुख स्पष्ट था—भूमि, धन और विकास—तीनों क्षेत्रों में पारदर्शिता को लेकर सख्ती बरती जाएगी। अब निगाहें एसआईटी की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिक गई हैं, जो यह तय करेंगे कि आरोप केवल सियासी शोर थे या प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता का संकेत।