
ग्राम परिवेश
पिछले दो महीनों से सोशल मीडिया पर सुनियोजित चरित्र-हनन का सामना कर रहे बिझड़ी पंचायत के पूर्व प्रधान संजय शर्मा ने अंततः मौन तोड़ते हुए तीखा और स्पष्ट प्रतिघात किया है। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने तथाकथित पत्रकारों और राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित आरटीआई कार्यकर्ताओं के उस संदिग्ध गठजोड़ को कठघरे में खड़ा किया, जो निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु समाज-विरोधी तत्वों के लिए कवच का काम कर रहा है।
संजय शर्मा ने बिना लाग-लपेट कहा कि “समाज सुधार” का दावा करने वाले कुछ चेहरे अब बेनकाब हो चुके हैं। उनके अनुसार, पत्रकारिता और आरटीआई जैसे सशक्त औजारों को सेवा के बजाय ‘उगाही’ का माध्यम बना लिया गया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यही तत्व अब उन चिट्टा तस्करों और जघन्य अपराधों में लिप्त लोगों के पक्ष में खड़े हैं, जिन्होंने क्षेत्र की युवा पीढ़ी को विनाश के कगार पर पहुंचाया है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी विवशता या स्वार्थ है, जो इन लोगों को समाज के दुश्मनों का पैरोकार बनने पर मजबूर कर रही है? जिस नशे ने अनगिनत परिवारों को उजाड़ा, माताओं की गोद सूनी की, उसी जहर के तस्करों को ‘पीड़ित’ बताने की कोशिश किस नैतिकता का परिचायक है?

पूर्व प्रधान ने अपने विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को तथ्यहीन और दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह पूरा प्रोपेगेंडा व्यक्तिगत खुन्नस और अवैध स्वार्थों की उपज है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग दूसरों की जमीनों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं और अपनी हताशा को छिपाने के लिए पत्रकारिता की आड़ में निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही ऐसे तथाकथित एक्टिविस्टों और नशा तस्करों के बीच की कथित सांठगांठ कानून के दायरे में उजागर होगी।
संजय शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि बिझड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस के सहयोग से आठ बड़े चिट्टा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाना उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। उनके अनुसार, इसी कारण क्षेत्र में तस्करों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है, जिससे बौखलाहट स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की नशे के प्रति शून्य-सहिष्णुता नीति और पुलिस के साथ मिलकर छेड़ी गई यह मुहिम किसी भी दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं होगी।
भावुक स्वर में उन्होंने कहा कि वे केवल एक माध्यम हैं, परंतु कमजोर माध्यम नहीं। उनके पीछे उन पीड़ित परिवारों का विश्वास और आशीर्वाद है, जिन्होंने नशे की भयावहता को झेला है। उनके अनुसार, यह हमला केवल उन पर नहीं, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा पर प्रहार है, जिन्होंने इस जहर के कारण अपनों को खोया है।
संजय शर्मा के इस स्पष्ट और प्रहारक बयान ने बिझड़ी ही नहीं, पूरे हमीरपुर क्षेत्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अब निगाहें उन तथाकथित समाजसेवियों पर टिक गई हैं, जिन पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शर्मा ने साफ कर दिया है कि वे हर स्तर पर कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं और नशे के खिलाफ उनका संकल्प पहले से अधिक दृढ़ हो चुका है।