
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
हिमालय की कठोर चट्टानों को ऊर्जा-संभावना में रूपांतरित करने का दीर्घ अनुभव रखने वाली टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड—जिसने उत्तराखंड में टिहरी डैम और कोटेश्वर बांध जैसी परियोजनाओं के माध्यम से जलविद्युत अभियंत्रण की जटिलताओं पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी—अब 444 मेगावाट क्षमता की विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर परियोजना में 3.1 किलोमीटर लंबी टेल रेस सुरंग में अवरोध-भेदन की उपलब्धि के साथ अपनी तकनीकी यात्रा को एक नए शिखर पर ले गई है। यह सफलता केवल एक सुरंग के आर-पार होने की घटना नहीं, बल्कि दशकों से अर्जित भू-तकनीकी दक्षता, जोखिम-प्रबंधन क्षमता और पर्वतीय परियोजना क्रियान्वयन की परिपक्वता का सशक्त उद्घोष है।
इसी सतत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कंपनी ने उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी भूभाग में अभियंत्रण कौशल का एक और मानक स्थापित किया है। चमोली जिले में विकसित यह नदी-प्रवाह आधारित जलविद्युत परियोजना अब अपने अंतिम निर्माण चरणों की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर है।
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सिपन कुमार गर्ग ने इसे संगठन की तकनीकी उत्कृष्टता, धैर्य और अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में टेल रेस सुरंग का सफल अवरोध-भेदन न केवल परियोजना क्रियान्वयन की सुदृढ़ क्षमता को दर्शाता है, बल्कि सतत जलविद्युत विकास के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। परियोजना के प्रारंभ होने पर यह 444 मेगावाट स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराएगी, जो भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेगी।
9.2 मीटर व्यास वाली यह टेल रेस सुरंग परियोजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिगत घटक है, जो विद्युत उत्पादन के बाद जल को पुनः नदी में प्रवाहित करती है। कुल 3.1 किलोमीटर लंबाई में से 1 किलोमीटर क्षेत्र में आंतरिक कंक्रीट परत का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो अंतिम चालूकरण की दिशा में स्थिर और सुनियोजित प्रगति का संकेत है।
कार्यकारी निदेशक (परियोजनाएं) कुमार शार्ड ने कहा कि चुनौतीपूर्ण भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों के बावजूद सुनियोजित स्थिरीकरण उपायों, सतत तकनीकी निगरानी और सूक्ष्म योजना के बल पर अंतिम चरण को सुरक्षित करते हुए यह अवरोध-भेदन संभव हो पाया। यह उपलब्धि केवल निर्माण की सफलता नहीं, बल्कि जटिल परिस्थितियों में संयमित नेतृत्व और तकनीकी अनुशासन की विजय भी है।
इस अवसर पर परियोजना प्रमुख अजय वर्मा, महाप्रबंधक (टेल रेस सुरंग/विद्युत गृह/टनल बोरिंग मशीन) के.पी. सिंह, महाप्रबंधक (विद्युत-यांत्रिक) आर.एस. राणा, सहायक महाप्रबंधक (विद्युत गृह) एस.पी. डोभाल, सहायक महाप्रबंधक (जल-यांत्रिक/यांत्रिक) संजय ममगाईं, एचसीसी के परियोजना प्रबंधक विनोद कुमार सहित कंपनी और संबद्ध एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन यह परियोजना हिमालयी अंचल में स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है, जो विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलित सेतु बनने की क्षमता रखती है।