मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश

देशभर में जब चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और समावेशिता पर बार-बार सवाल उठते हैं, हिमाचल प्रदेश ने महिला सहभागिता को लेकर एक नई और प्रेरणादायक दिशा प्रस्तुत की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नंदिता गुप्ता की अगुवाई में, प्रदेश में महिला मतदाता लिंग अनुपात सुधारने के लिए एक व्यावहारिक, सूक्ष्म और तथ्याधारित रणनीति अपनाई गई, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव प्रदेश के सबसे कम अनुपात वाले क्षेत्रों — 59-शिलाई और 02-भरमौर— में मात्र 45 दिनों के भीतर देखने को मिला। यह न सिर्फ निर्वाचन की शुद्धता का प्रमाण है, बल्कि लोकतंत्र में लैंगिक प्रतिनिधित्व को लेकर एक सराहनीय प्रयास भी है।

फोटो इंटरनेट से लिया गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नंदिता गुप्ता ने फोटोयुक्त मतदाता सूचियों-2025 के अंतिम प्रकाशन के संदर्भ में जानकारी दी कि राज्य का कुल महिला मतदाता लिंग अनुपात 981 है। हालांकि जिला स्तर पर विश्लेषण करने पर यह सामने आया कि सिरमौर जिले में यह अनुपात घटकर 921 था, और उससे भी नीचे, 59-शिलाई विधानसभा क्षेत्र में मात्र 820 दर्ज किया गया — जो पूरे प्रदेश में सबसे न्यूनतम था। इसी प्रकार, चंबा जिले का महिला मतदाता लिंग अनुपात 974 रहा, परंतु 02-भरमौर विधानसभा क्षेत्र में यह आंकड़ा 930 पर सीमित था।

इन आंकड़ों की गंभीरता को समझते हुए निर्वाचन आयोग ने एक विशेष रणनीति तैयार की, जिसके अंतर्गत जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे पंचायत सचिवों द्वारा तैयार -परिवार रजिस्टर- के साथ मतदाता सूचियों का क्रॉस वेरिफिकेशन करें। इस प्रक्रिया की शुरुआत सिरमौर के शिलाई क्षेत्र से की गई। जून माह में इस क्षेत्र में क्रॉस-परीक्षण किया गया और छुटे हुए पात्र महिला मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया युद्धस्तर पर चलाई गई।

बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को यह जिम्मेदारी दी गई कि वे विशेष रूप से उन महिलाओं से संपर्क करें जो शिक्षा या रोजगार के कारण अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर थीं। ऐसे मतदाताओं को ऑनलाइन फॉर्म-6 भरने के लिए प्रेरित किया गया और उचित सत्यापन के उपरांत उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया।

इस क्रम में, 4 और 5 जून 2025 को, मुख्य निर्वाचन अधिकारी स्वयं 59-शिलाई विधानसभा क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर गईं और मौके पर अधिकारियों को इस दिशा में विशेष प्रयास तेज़ करने के निर्देश दिए। साथ ही, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से भेजने के निर्देश भी दिए गए।

इन ठोस और सक्रिय पहलों का परिणाम यह हुआ कि मात्र 45 दिनों में शिलाई क्षेत्र का महिला लिंग अनुपात 820 से बढ़कर 831 तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे तेज़ और प्रभावी सुधार माना जा रहा है। वहीं भरमौर क्षेत्र में यह अनुपात 930 से बढ़कर 949 तक पहुंच गया है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि यह बदलाव मात्र आंकड़ों का सुधार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समावेशिता का सशक्त प्रमाण है।

इन दोनों क्षेत्रों में इतने कम समय में हुए इस परिवर्तन को निर्वाचन इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में दर्ज किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *