मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ ग्राम परिवेश
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 11वें सत्र ने न केवल 103 प्रतिशत उत्पादकता के साथ विधायी सक्रियता का नया मानक स्थापित किया, बल्कि इसके संचालन में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की संतुलित, निष्पक्ष और विधिसम्मत भूमिका विशेष रूप से उभरकर सामने आई। सत्र के दौरान उपजे स्पंदन और विवादों के बीच उन्होंने जिस सूझबूझ से सदन को संवैधानिक मर्यादाओं में साधे रखा, वह संसदीय कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है। विपक्ष को अपनी बात रखने के पर्याप्त अवसर प्रदान करते हुए उसे नियमों और गरिमा के दायरे में अनुशासित रखना, तथा साथ ही सत्ता पक्ष को तथ्यों और उपलब्धियों के साथ सदन के प्रति जवाबदेह बनाए रखना—इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की उनकी क्षमता ने इस सत्र को विशिष्ट आयाम प्रदान किया।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 11वें सत्र के समापन पर मीडिया से संवाद करते हुए कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि 14वीं विधानसभा का यह सत्र अपेक्षानुरूप सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली की सार्थकता और सक्रियता को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।

उन्होंने बताया कि यह सत्र दो चरणों में आयोजित किया गया—पहला चरण 16 से 18 फरवरी तथा दूसरा चरण 18 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक चला। 16 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ प्रारंभ हुए इस सत्र में कुल 16 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें लगभग 90 घंटे तक सदन की कार्यवाही चली। उल्लेखनीय है कि इस अवधि में सत्र की उत्पादकता 103 प्रतिशत दर्ज की गई, जो विधायी प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता का सशक्त संकेत है।

सत्र के प्रथम दिवस पर सदन ने पूर्व विधायक भगत राम चौहान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत विधायी कार्यवाही के दौरान सरकार ने कुल 617 प्रश्नों (471 तारांकित एवं 146 अतारांकित) के उत्तर प्रस्तुत किए, जो जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पठानिया ने बताया कि सत्र के दौरान शून्यकाल में 94 विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिनमें विभिन्न नियमों के अंतर्गत महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। इसके अतिरिक्त 16 फरवरी को राजस्व सहायता अनुदान से संबंधित एक सरकारी प्रस्ताव भी सदन में प्रस्तुत किया गया। 31 मार्च, 2026 का दिन गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस के रूप में निर्धारित किया गया, जिससे जनप्रतिनिधियों को अपने विचार रखने का समुचित अवसर मिला।

विधायी कार्यों की दृष्टि से यह सत्र अत्यंत सक्रिय रहा, जिसमें नौ सरकारी विधेयकों को प्रस्तुत कर विचार-विमर्श उपरांत पारित किया गया। साथ ही, विभिन्न समितियों की 60 रिपोर्टें सदन के पटल पर रखी गईं, जो नीतिगत विमर्श और प्रशासनिक समीक्षा की गंभीरता को रेखांकित करती हैं।

लोकतंत्र के प्रति नई पीढ़ी के बढ़ते आकर्षण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान प्रदेश भर के सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों के 649 विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखा। यह सहभागिता लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति युवाओं के विश्वास और जिज्ञासा का प्रतीक है।

सत्र के संचालन पर संतोष व्यक्त करते हुए कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि उन्होंने सदन में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने का हरसंभव प्रयास किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, उपमुख्यमंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री सहित दोनों पक्षों के सदस्यों का कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने में दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

अंत में उन्होंने सदन के सभी सदस्यों, राज्य सरकार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा विधानसभा सचिवालय के कर्मियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की, जिन्होंने दिन-रात परिश्रम कर सत्र को समयबद्ध और सफल बनाया। साथ ही प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों की भूमिका को भी सराहते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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